ज्ञानेश कुमार : अहम सरकारी जिम्मेदारियों से लेकर एसआईआर विवाद तक
ज्ञानेश कुमार : अहम सरकारी जिम्मेदारियों से लेकर एसआईआर विवाद तक
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) जब ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था, तब उनके करियर के विवरण में संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राम मंदिर न्यास की स्थापना से जुड़ी उनकी भूमिका का प्रमुखता से उल्लेख किया गया था।
लेकिन 19 महीने बाद, निर्वाचन आयोग में उनके सामने शायद अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है तथा मतदाता सूचियों के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर दोनों साथी निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियां सामने आई हैं।
अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक पड़ताल के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 माह में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जिनके बारे में आयुक्तों का कहना था कि ये उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए।
इन आपत्तियों में वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस का केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग मत होना विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और एसआईआर से जुड़े फैसलों सहित उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
संधू और जोशी ने अपने नाम से जुड़ी इन आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।
इन खुलासों के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर कुमार के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े हो गए है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग ने पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम किया। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप पर कुमार की प्रतिक्रिया की भी आलोचना हुई थी। उन्होंने कांग्रेस नेता से अपने आरोप को शपथपत्र के जरिए साबित करने या माफी मांगने को कहा था।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर कुमार की नियुक्ति को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे। वह 2023 में बनाए गए उस कानून के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर नियुक्त होने वाले पहले व्यक्ति थे, जिसमें चयन समिति से प्रधान न्यायाधीश को हटाकर उनकी जगह केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया था। इसके परिणामस्वरूप तीन सदस्यीय चयन समिति में सरकार के दो सदस्य हो गए।
समिति में विपक्ष के एकमात्र सदस्य राहुल गांधी ने मांग की थी कि उनकी नियुक्ति पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक उच्चतम न्यायालय इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर लेता।
उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने को लेकर अलग-अलग राय दी।
केरल कैडर के 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कुमार जनवरी 2024 में सहकारिता मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले मार्च में निर्वाचन आयोग में उनकी नियुक्ति हुई। वह 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 को समाप्त होना है।
कुमार ने केंद्र में वरिष्ठ पदों पर जाने से पहले केरल सरकार में कई पदों पर काम किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय में उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद लिए गए फैसलों और उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद राम जन्मभूमि न्यास की स्थापना से जुड़े काम में भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में काम किया।
उन्होंने रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव तथा गृह मंत्रालय (एमएचए) में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के रूप में भी काम किया।
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुमार ने कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके अलावा उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया (आईसीएफएआई) से ‘बिजनेस फाइनेंस’ और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई की।
संधू की निर्वाचन आयोग में नियुक्ति मार्च 2024 में कुमार के साथ हुई थे।
उत्तराखंड कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संधू इससे पहले राज्य के मुख्य सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन और लोकपाल के सचिव के रूप में काम कर चुके हैं। उनका निर्वाचन आयोग से कार्यकाल जुलाई 2028 में समाप्त होना है।
जोशी 19 फरवरी 2025 को निर्वाचन आयोग में शामिल हुए थे, उसी दिन कुमार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था। हरियाणा कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी जोशी इससे पहले हरियाणा के मुख्य सचिव रह चुके हैं। केंद्र में उनकी जिम्मेदारियों में वित्तीय सेवा विभाग और रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय में पद शामिल रहे हैं।
संधू का कार्यकाल कुमार से पहले समाप्त हो जाएगा। ऐसे में, यदि दोनों तब तक अपने-अपने पद पर बने रहते हैं, तो कुमार का कार्यकाल पूरा होने के समय जोशी वरिष्ठ निर्वाचन आयुक्त होंगे। हालांकि, इसके बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर उनकी नियुक्ति कानून में निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत ही हो सकेगी।
भाषा खारी अविनाश
अविनाश

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