हरिद्वार भूमि घोटाला: तत्कालीन नगर आयुक्त , तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति
हरिद्वार भूमि घोटाला: तत्कालीन नगर आयुक्त , तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति
देहरादून, 19 जून (भाषा) उत्तराखंड के हरिद्वार में करोड़ों रुपए के कथित भूमि खरीद घोटाले में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई में हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किए जाने तथा हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कमेंद्र सिंह को कड़ी सजा दिये जाने की संस्तुति की गयी है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी ।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आईएएस अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को संस्तुति भेजी जा रही है।
इसके अलावा, हरिद्वार के तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। अजयवीर सिंह पीसीएस अधिकारी हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गयी है जबकि कमेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निवर्हन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उन्हें कड़ा दंड देने का निर्णय लिया गया है ।
आरोप है कि हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में कूड़े के ढेर के पास स्थित 2.30 हेक्टेअर अनुपयुक्त और सस्ती कृषि जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित कर उसे बाजार भाव से साढ़े तीन गुने से अधिक मंहगे दामों पर 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि इस भूमि की न तो वास्तविक आवश्यकता थी और न ही पारदर्शी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। इसके अलावा, भूमि खरीद में शासन के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर संदेहास्पद तरीके से सौदा किया गया ।
पिछले साल मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इन तीनों अधिकारियों समेत 10 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था तथा दो अन्य कार्मिकों का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सतर्कता विभाग से कराए जाने तथा उक्त भूमि घोटाले से संबंधित विक्रय पत्र को निरस्त करते हुए जमीन मालिकों को दिए गए धन की वसूली सुनिश्चित करने को कहा था ।
मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए धामी ने चौधरी के कार्यकाल के दौरान हरिद्वार नगर निगम में हुए सभी कार्यों का विशेष आडिट कराए जाने के भी आदेश दिए थे।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने प्रकरण में संलिप्त पाए गए 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने को भी मंजूरी दी है ।
अधिकारियों ने बताया कि सतर्कता विभाग की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित हुए हैं । इसके आधार पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने का मुख्यमंत्री ने अनुमोदन दिया है ।
जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
चौधरी के अलावा, जिन व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा, उनमें तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं ।
इसके अलावा, भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों, सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा जनधन और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
भाषा दीप्ति राजकुमार
राजकुमार

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