हरियाणा का लिंगानुपात 2025 में बढ़कर 923 हुआ, पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक
हरियाणा का लिंगानुपात 2025 में बढ़कर 923 हुआ, पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक
चंडीगढ़, दो जनवरी (भाषा) हरियाणा में लिंग अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो 2025 में 923 तक पहुंच गया। यह 2024 के मुकाबले 13 अंकों की वृद्धि दर्शाता है। प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण और अवैध गर्भपात को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को इस उपलब्धि का कारण बताया जा रहा है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि हरियाणा में लिंग अनुपात (एसआरबी) 2025 में 923 दर्ज किया गया, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। वर्ष 2024 में यह 910 था।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में राज्य में 5,19,691 बच्चों का जन्म हुआ – जिनमें 2,70,281 लड़के और 2,49,410 लड़कियां थीं, जबकि 2024 में 5,16,402 बच्चों का जन्म हुआ जिनमें 2,46,048 लड़कियां थीं।
अधिकारियों ने एसआरबी में सुधार का श्रेय राज्य सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों को दिया, जिनमें हरियाणा में लिंग-चयनित गर्भपात और गर्भावस्था समाप्ति (एमटीपी) किट की अवैध बिक्री के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में लिंग अनुपात पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक था। हरियाणा का लिंग अनुपात 2019 में 923 था, जो 2020 में मामूली रूप से घटकर 922 हो गया तथा फिर 2021 में और घटकर 914 रह गया।
वर्ष 2022 में यह 917 था और 2023 में 916 था।
राज्य का लिंग अनुपात 2014 में 871 था, जो बढ़कर 2015 में 876 हो गया। 2016 में इसमें 24 अंकों की वृद्धि हुई और यह 900 तक पहुंच गया, जो अब तक की सबसे अधिक वृद्धि थी। 2017 में लिंग अनुपात और बढ़कर 914 हो गया, जो दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि थी, तथा 2018 में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, पंचकूला में प्रति 1,000 पुरुषों पर 971 महिलाओं के साथ राज्य का उच्चतम एसआरबी दर्ज किया गया, जो 2024 में दर्ज किए गए 915 के मुकाबले 56 अंकों की वृद्धि दर्शाता है।
जिन जिलों में एसआरबी की संख्या 950 से अधिक रही, उनमें फतेहाबाद (961) और पानीपत (951) शामिल हैं।
इसके साथ ही जिन जिलों में एसआरबी राज्य औसत से ऊपर रहा, उनमें अंबाला (926), भिवानी (926), हिसार (926), कैथल (924), करनाल (944), कुरूक्षेत्र (927), मेवात (935), सिरसा (937) और यमुनानगर (943) शामिल हैं।
हालांकि, गुरुग्राम में एसआरबी में केवल दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई और यह 901 पर पहुंच गया, जबकि सोनीपत में यह सात अंकों की गिरावट के साथ 894 पर और जींद में एक अंक की गिरावट के साथ 918 पर रह गया।
चरखी दादरी, फ़रीदाबाद, कैथल और पानीपत में भी 2025 में लिंगानुपात में सुधार देखा गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब भाजपा ने 2014 में सरकार बनाई थी, तब हरियाणा का लिंग अनुपात 871 था, जो उस समय देश में सबसे कम में से एक था।
सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में पानीपत से राष्ट्रव्यापी ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू किए जाने के बाद राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए।
अधिकारियों के अनुसार, 2024 में एसआरबी में गिरावट के बाद, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) सुधीर राजपाल के नेतृत्व में एक कार्यबल का गठन किया गया था। इसने स्वास्थ्य विभाग, आयुष विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित कीं।
उन्होंने बताया कि लिंग-चयनित गर्भपात और एमटीपी किट की बिक्री से संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने बताया कि एमटीपी अधिनियम के तहत कुल 114 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें से 83 मामलों में अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए गए।
उन्होंने बताया कि 2025 में, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के उल्लंघन को लेकर 154 छापे मारे गए, 41 मेडिकल स्टोर सील किए गए और 395 एमटीपी केंद्र बंद कर दिए गए।
भाषा
नेत्रपाल नरेश
नरेश

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