कोलकाता, 11 अगस्त (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लंबित तीन आपराधिक कार्यवाहियों में उन्हें गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम राहत मंगलवार को 31 अगस्त तक बढ़ा दी।
अदालत ने बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन प्राथमिकियों को रद्द करने संबंधी उनकी याचिका पर अपना अंतिम आदेश पारित करने के लिए 25 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने डायमंड हार्बर के सांसद को दी गई अंतरिम राहत 31 अगस्त तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, बढ़ा दी।
अदालत ने शिकायतकर्ता की इस दलील को स्वीकार करने से मना कर दिया कि बनर्जी ‘‘अत्यधिक प्रभावशाली’’ हैं और उन्हें अंतरिम राहत देने से जांच एवं मुकदमा प्रभावित होगा।
अदालत ने कहा कि सत्तारूढ़ व्यवस्था में बदलाव के बाद पश्चिम बंगाल में स्थिति बदल गई है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने भवानीपुर में 27 मई, कालीतल्ला और बिष्णुपुर में 16 जून को दर्ज तीन प्राथमिकियों के संबंध में बनर्जी को 17 अगस्त तक अंतरिम राहत दी थी।
बनर्जी के वकील के आवेदन पर अदालत ने पुलिस अधिकारियों को डायमंड हार्बर सांसद के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार ने छह अगस्त को अदालत को अवगत कराया था कि विभिन्न आरोपों को लेकर राज्य भर के विभिन्न थानों में बनर्जी के खिलाफ कुल 16 प्राथमिकी लंबित हैं।
शिकायतकर्ता अभिजीत दास के वकील जयंत नारायण चटर्जी ने अंतरिम राहत के अनुरोध का विरोध करते हुए दावा किया कि बनर्जी ‘‘अत्यधिक प्रभावशाली’’ हैं।
उन्होंने दावा किया कि यदि याचिकाकर्ता को हिरासत में नहीं लिया गया, तो गवाहों को डराया-धमकाया जाएगा और उन्हें अदालतों के सामने गवाही देने से रोका जाएगा।
चटर्जी ने अनुरोध किया कि अगर बनर्जी को अंतरित राहत दी जाती है तो उनके मुवक्किल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए।
उन्होंने दावा किया कि अन्यथा दास की ‘‘हत्या’’ कराई जा सकती है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार बदलने के बाद राज्य में स्थिति बदल गई है।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि बनर्जी अब भी इतने प्रभावशाली हैं, तो आमतला स्थित उनके सांसद कार्यालय को ध्वस्त करने की कार्रवाई कैसे शुरू की गई, जिसे लेकर उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका लंबित है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने रेखांकित किया कि यह चटर्जी के दावे का समर्थन नहीं करता है।
न्यायमूर्ति ने कहा कि तोड़फोड़ की कार्रवाई शुक्रवार को भी की गई थी, जिसके कारण अदालत को सप्ताहांत में सुनवाई करनी पड़ी।
भाषा खारी सुरेश
सुरेश