स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला प्रकोप के बीच राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला प्रकोप के बीच राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला प्रकोप के बीच राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए
Modified Date: May 22, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: May 22, 2026 7:57 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति (पीएचईआईसी) घोषित करने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी बढ़ाने, अस्पतालों की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को 21 मई को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि कांगो और युगांडा से सटे देशों में बीमारी फैलने का खतरा अधिक आंका गया है, जिनमें दक्षिण सूडान भी शामिल है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘हालांकि वर्तमान आकलन के अनुसार प्रभावित अफ्रीकी क्षेत्र के बाहर के देशों के लिए जोखिम कम है, लेकिन व्यापक पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और यात्रा को देखते हुए स्वास्थ्य प्रणाली के सभी स्तरों पर पर्याप्त तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता बनाए रखना जरूरी है।’’

मंत्रालय ने राज्यों को एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत निगरानी मजबूत करने का निर्देश दिया है, ताकि इबोला जैसे लक्षणों वाले असामान्य मामलों के समूहों की पहचान की जा सके, विशेषकर उन लोगों में जिनकी हाल में प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा का इतिहास रहा हो।

परामर्श में बताए गए लक्षणों में बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और आंखों का लाल होना शामिल हैं।

राज्यों को पृथक वार्ड, एम्बुलेंस, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), आवश्यक लॉजिस्टिक्स, प्रयोगशाला सहायता और गंभीर रोगियों के उपचार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

परामर्श में हवाई अड्डों और बंदरगाह स्वास्थ्य प्राधिकरणों, राज्य एवं जिला निगरानी इकाइयों तथा अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित सूचना साझा करने पर जोर दिया गया है।

मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की ‘थर्मल स्क्रीनिंग’ और स्वास्थ्य निगरानी की जाएगी। इबोला जैसे लक्षण पाए जाने पर उन्हें जांच और उपचार के लिए निर्धारित पृथक केंद्रों में भेजा जाएगा।

एसओपी में प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की 21 दिनों तक निगरानी, पृथकवास, संक्रमण रोकथाम, प्रयोगशाला जांच, संपर्क में आए लोगों की पहचान और चिकित्सकीय प्रबंधन के विस्तृत प्रोटोकॉल भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य सचिव ने पत्र में कहा, ‘‘राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध है कि वे मौजूदा तैयारियों की तत्काल समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति की समय पर पहचान और प्रतिक्रिया के लिए उपयुक्त व्यवस्था मौजूद हो।’’

भाषा गोला रंजन

रंजन


लेखक के बारे में