कई स्थानों पर बैटरी पुनर्चक्रण इकाइयों के पास की मिट्टी में अधिक मात्रा में सीसा मिला: अध्ययन
कई स्थानों पर बैटरी पुनर्चक्रण इकाइयों के पास की मिट्टी में अधिक मात्रा में सीसा मिला: अध्ययन
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में किये गए एक अध्ययन में बैटरी पुनर्चक्रण इकाइयों के पास की मिट्टी में सीसा (लेड) प्रदूषण अधिक पाया गया है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
‘सीसे वाली मिट्टी: बैटरी पुनर्चक्रण से’ शीर्षक वाला यह विश्लेषण पर्यावरण अनुसंधान और पैरोकार संगठन ‘टॉक्सिक्स लिंक’ द्वारा किया गया था और बुधवार को प्रकाशित हुआ।
अध्ययनकर्ताओं ने अध्ययन के लिए चयन किये गए शहरों में लेड-एसिड बैटरी पुनर्चक्रण इकाइयों के पास से एकत्र किए गए मिट्टी के 23 नमूनों की जांच की, जिनमें आवासीय क्षेत्रों, स्थानीय समुदायों और प्राथमिक विद्यालयों के निकट के स्थान शामिल थे।
विश्लेषण में कहा गया है, ‘सभी नमूनों में 100 पीपीएम से लेकर 43,800 पीपीएम (प्रति 10 लाख पर कण की मात्रा) तक व्यापक सीसा संदूषण के सबूत मिले हैं।’’
पर्यावरण संरक्षण (प्रदूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के संदर्भ में निष्कर्षों से पता चला कि एकत्र किये गए मिट्टी के नमूनों में से 52 प्रतिशत (23 नमूनों में से 12) में सीसे की सांद्रता खतरनाक संदूषित स्थल के लिए निर्धारित 5,000 पीपीएम के मानक से अधिक थी।
इसके अलावा, 31 प्रतिशत नमूनों में औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नियम में निर्धारित अनुमति प्राप्त सीमा से अधिक मात्रा पाई गई।
अध्ययन में कहा गया है, ‘‘अप्रत्याशित रूप से, अनधिकृत इकाइयों से एकत्र किए गए नमूनों की तुलना में अधिकृत पुनर्चक्रण इकाइयों (औपचारिक इकाइयों) से एकत्र किए गए नमूनों में सीसे की मात्रा औसत से अधिक पाई गई।’’
भाषा शुभम सुभाष
सुभाष

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