हिमाचल प्रदेश भूमि विवाद: मुख्य सचिव ने आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताया
हिमाचल प्रदेश भूमि विवाद: मुख्य सचिव ने आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया
शिमला, 31 मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने मंगलवार को सोलन में चेस्टर हिल आवास परियोजना से जुड़े आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
परियोजना में भूमि कानूनों का उल्लंघन होने संबंधी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के दावे और राज्य में बेनामी भूमि सौदों सहित कथित भूमि माफिया गतिविधियों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच की मांग के एक दिन बाद, गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।
हिमाचल प्रदेश काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए, वामपंथी नेताओं ने कहा है कि मुख्य सचिव को उनके पद से हटाए बिना निष्पक्ष जांच असंभव है। धारा 118 गैर-हिमाचली लोगों के बिना पूर्व अनुमति के भूमि की खरीद पर रोक लगाती है।
चेस्टर हिल से जुड़ा मुद्दा मंगलवार को हिमाचल विधानसभा में फिर से उठा। भाजपा के वरिष्ठ विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शून्यकाल के बाद सदन में ‘व्यवस्था का प्रश्न’ उठाते हुए यह मुद्दा उठाया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सोलन के उपायुक्त (डीसी) द्वारा तैयार की गई उस जांच रिपोर्ट को मंगवाने का आग्रह किया, जिसमें काश्तकारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के कथित उल्लंघन में 274 बीघा भूमि के अधिग्रहण का मामला है। उन्होंने इस मामले की जांच शुरू करने की मांग की।
सत्ती ने कहा कि इस मामले की जांच आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जानी चाहिए।
मंगलवार को यहां मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य सचिव गुप्ता ने आरोप लगाया कि दो पूर्व आईएएस अधिकारी और एक इंजीनियर उनके खिलाफ ‘‘षड्यंत्र’’ रच रहे हैं, क्योंकि उन्होंने विद्युत बोर्ड में सेवा करते समय उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं।
माकपा के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने सोमवार को दावा किया था कि चेस्टर हिल परियोजना में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) द्वारा की गई जांच में भूमि अधिग्रहण और बेनामी भूमि लेनदेन के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
भाषा सुभाष माधव
माधव

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