हिमाचल : आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी

हिमाचल : आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी

हिमाचल : आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी
Modified Date: April 5, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: April 5, 2026 8:35 pm IST

शिमला, पांच अप्रैल (भाषा) हिमाचल प्रदेश सरकार ने आवारा और बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2025-26 में ‘गोपाल योजना’ के तहत 14.68 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

यह राशि राज्यभर में परित्यक्त और बेसहारा गायों के उचित देखभाल, आश्रय और कल्याण के लिए रखरखाव अनुदान के रूप में दी गई है।

सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि आवारा पशुओं से उत्पन्न गंभीर समस्याओं, विशेषकर खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार ने इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी है।

प्रवक्ता ने कहा, “राज्य के कई हिस्सों में किसान फसलों के नुकसान से भारी आर्थिक हानि झेल रहे थे, और कुछ क्षेत्रों में स्थिति ऐसी बन गई थी कि किसानों को खेती कम करनी पड़ी या पूरी तरह छोड़नी पड़ी।”

प्रवक्ता के अनुसार पशुओं की देखभाल को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीति पहल के तहत पंजीकृत गौशालाओं और गौ अभयारण्यों में गायों के रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि एक अक्टूबर 2025 से प्रति गाय मासिक अनुदान 700 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दिया गया है।

यह बढ़ी हुई सहायता हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग के माध्यम से वितरित की जा रही है, जिससे पशुओं के बेहतर प्रबंधन, पोषण और स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित की जा सके।

प्रवक्ता ने कहा कि आवारा पशुओं के उचित पुनर्वास से न केवल किसानों की समस्याएं कम होंगी और वे पुनः खेती की ओर लौट सकेंगे, बल्कि सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा, क्योंकि कई सड़क दुर्घटनाएं आवारा पशुओं के कारण होती हैं।

उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने कई गौ अभयारण्य और बड़े गौसदन स्थापित किए हैं। साथ ही सरकार ने स्वैच्छिक संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और व्यापारिक संस्थानों को इन्हें गोद लेने की अनुमति देने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा, वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में भी आवारा पशुओं के पुनर्वास के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।

भाषा रवि कांत रवि कांत रंजन

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