एसआईआर की वजह से बांग्लादेश से बंगाल आए हिंदू सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे: माकपा नेता
एसआईआर की वजह से बांग्लादेश से बंगाल आए हिंदू सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे: माकपा नेता
(सुदीप्तो चौधरी)
कोलकाता, एक जनवरी (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता कांति गांगुली ने दावा किया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से सबसे ज्यादा प्रभावित बांग्लादेश से आकर पश्चिम बंगाल में बसे हिंदू होंगे।
पूर्व मंत्री गांगुली को शुक्रवार को दस्तावेज सत्यापन सुनवाई के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया के पक्ष में हैं, लेकिन इसे केवल दो-तीन महीनों के बजाय लंबी अवधि में किया जाना चाहिए था।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मैं एसआईआर के पक्ष में हूं, लेकिन यह एक बहुत बड़ा और चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसे और अधिक त्रुटिरहित एवं सटीक बनाने के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए था। भारत एक विशाल राष्ट्र है जिसकी जनसंख्या बहुत अधिक है, इसलिए मतदाता सूचियों के बेहतर पुनरीक्षण के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए था।’’
गांगुली (82) ने 2001 से 2011 तक सुंदरबन विकास विभाग के मंत्री के रूप में और 2009 से 2011 तक थोड़े समय के लिए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री के रूप में अपनी सेवा दी है
उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं सुंदरबन क्षेत्र से हूं। यहां बांग्लादेश से आकर बसे हिंदुओं की एक बड़ी आबादी है। इस प्रक्रिया से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले ये लोग ही होंगे।’’
गांगुली ने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए उचित दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए थे, ताकि मतदाताओं को भ्रम न हो और ‘गलत अटकलें एवं निराधार सिद्धांत’ व्यापक रूप से प्रसारित न हों।
इस प्रक्रिया के विरोध पर गांगुली ने कहा कि विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को इस प्रक्रिया की ‘खास कमियों’ को इंगित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं होना चाहिए। एसआईआर का विरोध करने वाले विपक्षी दलों को पुनरीक्षण के कारण आम मतदाताओं को हो रही समस्याओं को उजागर करना चाहिए। उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वे विरोध क्यों कर रहे हैं।’’
माकपा नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग को विपक्षी दलों के दबाव में नहीं झुकना चाहिए, उसे तटस्थ रहना चाहिए और इस प्रक्रिया को सटीकता से पूरा करना चाहिए।
गांगुली ने कहा कि उन्हें सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर आश्चर्य हुआ क्योंकि 2002 में जब वह मंत्री थे तब उनका नाम मतदाता सूची में था।
उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को सत्यापन सुनवाई के लिए उपस्थित होंगे और निर्वाचन आयोग को सभी प्रासंगिक जानकारी प्रदान करेंगे।
भाषा
शुभम नरेश राजकुमार
राजकुमार

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