भाजपा कब तक किसानों को कर्ज माफी का जुमला देती रहेगी: कांग्रेस
भाजपा कब तक किसानों को कर्ज माफी का जुमला देती रहेगी: कांग्रेस
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मध्य प्रदेश में किसानों का कर्ज माफ करने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है और पूछा कि वह (भाजपा) कब तक किसानों को कर्ज माफी का जुमला देती रहेगी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मध्य प्रदेश के धार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली से पहले उनसे ये सवाल पूछे।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भाजपा कब तक किसानों को कर्जमाफी का जुमला देती रहेगी? मध्य प्रदेश में ‘डबल अन्याय’ सरकार राशन के रूप में पशुओं का चारा क्यों बांट रही थी? मध्य प्रदेश आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत उनके अधिकार देने में क्यों विफल रहा है? मध्य प्रदेश ‘पेसा’ (पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार कानून) को शब्दशः कब लागू करेगा?’’
रमेश ने कहा कि 2008 में, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य के किसानों के 50,000 रुपए के कर्ज माफ करने का वादा करते हुए पर्चे वितरित किए थे।
उन्होंने दावा किया कि 16 साल बाद भी भाजपा ने यह वादा पूरा नहीं किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल, मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार जिसने वास्तव में 2018-19 में 27 लाख किसानों के लिए ऋण माफी लागू की थी, उसे धन और संस्थाओं की शक्ति के दुरुपयोग के माध्यम से गिरा दिया गया।’’
रमेश ने कहा कि कांग्रेस के ‘न्याय पत्र’ में ऋण माफी और इसके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना करने का वादा किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या प्रधानमंत्री मोदी भी इसके लिए प्रतिबद्धता दिखाएंगे? क्या भाजपा उस जुमले को पूरा करेगी, जो वे वर्षों से उछालते आ रहे हैं?’’
उन्होंने कहा कि 2020 में, कोविड-19 महामारी के दौरान, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर ऐसे अनाज वितरित करने का आरोप लगाया था, जो ‘मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त’ और ‘बकरी, घोड़े, भेड़ और अन्य मवेशियों के लिए उपयुक्त’ था और जिसे मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में राशन के रूप में दिया जा रहा था।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अब प्रधानमंत्री मोदी किस मुंह से अपनी मुफ्त राशन योजना के लिए मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों से वोट मांग रहे हैं? क्या प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के लोगों के इस शर्मनाक रवैये का समर्थन करते हैं?’’
उन्होंने कहा कि 2006 में कांग्रेस ने क्रांतिकारी वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) पारित किया था, जिसने आदिवासियों और वन में रहने वाले अन्य समुदायों को अपने खुद के जंगलों का प्रबंधन करने और उनसे प्राप्त उपज से आर्थिक रूप से लाभ उठाने का कानूनी अधिकार दिया था।
रमेश ने कहा, ‘‘लेकिन भाजपा सरकार एफआरए के कार्यान्वयन में बाधा डालती रही है, जिससे लाखों आदिवासी इसके लाभों से वंचित हो रहे हैं। कुल दायर किए गए 6,27,513 व्यक्तिगत दावों में से केवल 47 प्रतिशत (2,94,877 दावे) मंजूर किए गए हैं। वहीं, इसके तहत वितरित की गई भूमि, स्वामित्व सामुदायिक अधिकारों के लिए पात्र 57,948 वर्ग किलोमीटर का केवल 10 प्रतिशत(5,931 वर्ग किमी) है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार राज्य के आदिवासी समुदायों को उनका अधिकार देने में क्यों विफल रही है?’’
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने 15 नवंबर 2022 को ‘पेसा’ के नियमों को अधिसूचित किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘ ‘पेसा’ आदिवासी क्षेत्रों में अधिसूचित ग्राम सभाओं को वन क्षेत्रों में सभी प्राकृतिक संसाधनों के संबंध में नियमों पर निर्णय लेने का अधिकार देता है। लेकिन राज्य और केंद्र की भाजपा सरकार ने नियमित रूप से ‘पेसा’ का उल्लंघन किया है।’’
रमेश ने कहा कि इसका सबसे ताजा उदाहरण मंडला के बसनिया-ओढारी बांध से सामने आया है, जहां बांध के निर्माण के लिए 31 आदिवासी गांव के लोगों को बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह, अलीराजपुर में आदिवासियों ने ग्राम सभा की सहमति के बिना अपनी भूमि में सरकार द्वारा खनिजों की खोज के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। क्या प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश में ‘पेसा’ को शब्दश: लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं? या वह अपनी आंखें बंद कर लेंगे, क्योंकि उनकी सरकार और पार्टी नियमित रूप से इस कानून का उल्लंघन कर रही है?’’
इससे पहले रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी की मध्य प्रदेश के खरगोन में आयोजित रैली से पहले उनसे कुछ प्रश्न किए।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भाजपा मध्य प्रदेश के आदिवासी जिलों में रेल संपर्क उन्नत बनाने में विफल क्यों रही? ‘मोदी का परिवार’ में आदिवासियों का स्वागत क्यों नहीं होता? मोदी सरकार प्रवासी श्रमिकों की लगातार अनदेखी क्यों कर रही है ?’’
उन्होंने कहा, ‘‘10 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी मोदी सरकार दाहोद-इंदौर और छोटा उदयपुर-धार रेलवे लाइन को पूरा करने में विफल रही है। इन रेलवे लाइन को संप्रग सरकार ने मंजूरी दी थी। दस साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बेहतर रेल कनेक्टिविटी मध्य प्रदेश के अपेक्षाकृत अलग-थलग आदिवासी बहुल जिलों धार और झाबुआ में समृद्धि लाएगी, लेकिन राज्य और केंद्र की भाजपा सरकारों ने इस परियोजना को नजरअंदाज किया है। क्या प्रधानमंत्री इन महत्वपूर्ण रेलवे लाइनों में 10 से भी ज्यादा वर्ष की देरी के लिए स्पष्टीकरण देंगे? क्या इसका कारण आदिवासी समुदाय के प्रति उनकी सामान्य रूप से दिखने वाली उदासीनता है?’’
रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने न केवल मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों की उपेक्षा की है, बल्कि उनके बीच भय का वातावरण भी पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय बजट में आदिवासियों के लिए आवंटन 2017 में नीति आयोग द्वारा निर्धारित 8.2 प्रतिशत लक्ष्य से लगातार कम हो गया है। मध्य प्रदेश में आदिवासी कल्याण के लिए 3 लाख करोड़ रुपए आवंटित करने का उनका चुनावी वादा अधूरा है।’’
रमेश ने कहा, ‘‘झाबुआ में प्रधानमंत्री की रैली के बाद बैतूल में भाजपा कार्यकर्ता एक आदिवासी युवक को बेरहमी से पीटते दिखे। पिछले साल एक वीडियो में एक भाजपा नेता को सार्वजनिक रूप से एक आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करते हुए देखा गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि ‘मोदी के परिवार’ में आदिवासी समुदाय के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस पार्टी आदिवासी कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।’’
भाषा वैभव दिलीप
दिलीप

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