सरकारी स्कूल में पढ़ती और मिड डे मिल खाती है कलेक्टर की बिटिया
सरकारी स्कूल में पढ़ती और मिड डे मिल खाती है कलेक्टर की बिटिया
देश की सरकारी स्कूलों की शिक्षा को लेकर अक्सर हम ये सुनते हैं कि वहां तो अब कुछ बचा ही नहीं है, शिक्षकों की कमी, आए दिन कभी वेतन तो कभी नियमितीकरण की मांग को लेकर शिक्षकों की हड़ताल, किसी स्कूल के पास भवन नहीं तो किसी के पास कमरे नहीं और किसी के पास शौचालय नहीं, कहीं बिजली ही नहीं तो कंप्यूटर शिक्षा की बात ही नहीं तो कहीं खेल मैदान ही नहीं तो स्पोर्ट्स क्लास की जरूरत ही नहीं वगैरह-वगैरह। शायद यही स्थिति है कि जो सक्षम हैं, जिनके पास पैसे हैं, वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से दूर ही रखते हैं, साथ ही ऐसे लोग भी कम नहीं, जो पैसों की तंगी के बाद भी अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों या बड़े नाम वाले स्कूलों में कराना पसंद करते हैं। वैसे एक सच ये भी है कि आज भी कई सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों से अच्छी शिक्षा प्रदान की जाती है.. छात्रों को ज्यादा सुविधाएं दी जाती हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 स्कूल के बुनियादी ढांचे में जिन दस चीजों को शामिल किया है उनमें शौचालय, पीने का पानी,खेल का मैदान आदि शामिल हैं। माना ये जाता है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं कम होती है, सरकार द्वारा दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (मिड डे मीले) को लेकर भी कई शिकायतें आती हैं. तो इन सब को लेकर अगर अभिभावकों के मन में सरकारी शिक्षा प्रणाली को लेकर भ्रम पैदा होता है, तो गलत नहीं है.
सरकारी स्कूल में पढ़ेगी IPS अधिकारी की बेटी
आप सोच रहे होंगे कि ये तो हर कोई जानता है, फिर इसमें खबर क्या है, तो हम बता दें कि इस पर लिखने की वजह खास है.. दरसअल सोशल मीडिया पर सर्फिंग के दौरान हमारी नजर एक खास तस्वीर पर पड़ी जिसको लेकर हमने सोचा कि क्यों न ये तस्वीर आपके साथ भी साझा की जाए ताकि आप सरकारी स्कूलों की शिक्षा को लेकर न सिर्फ सोच सकें बल्कि नई सोच बना भी सकें और तय कर सकें कि क्या आपके बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में शिक्षा लेनी चाहिए?
सरकारी स्कूल को बढ़ावा, कलेक्टर ने अपनी बेटी को सरकारी स्कूल में भर्ती कराया
आपको याद होगा कि 6 महीने पहले एक खबर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी, जब छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने एक अनूठी पहल की थी। उन्होंने अपनी बेटी का एडमिशन किसी प्राइवेट स्कूल में नहीं बल्कि सरकारी स्कूल में कराया था. जब लोगों ने ये पढ़ा कि एक कलेक्टर ने अपनी बेटी को शिक्षा देने की शुरुआत किसी बड़े स्कूल से नहीं बल्कि आंगनवाड़ी से की है तो उन्हें बड़ी हैरानी हुई।..
देखें तस्वीर..

खास बात ये है कि ज़िला कलेक्टर की बेटी सरकारी स्कूल में न सिर्फ पढ़ती है बल्कि स्कूल के बाकी बच्चों की तरह वहां मिलने वाला मिड डे मिल भी खाती है। अपनी बेटी के साथ मध्याह्न भोजन करते बलरामपुर जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ये तस्वीर काफी वायरल हो रही है.. सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की सोच और भ्रम पर ये तस्वीर साफ संदेश दे रही है कि आप भी सरकारी स्कूलों अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेज सकते हैं क्योंकि अगर आप वाकई सरकारी शिक्षा प्रणाली में सुधार चाहते हैं तो खुद आपको भी सुधार में भागीदार बनने की जरूरत है।
अर्जुन सिंह, IBC24

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