केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सात दिनों के अंदर नहीं हटाया गया तो देशव्यापी आंदोलन करेंगे: सीजेपी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री को सात दिनों के अंदर नहीं हटाया गया तो देशव्यापी आंदोलन करेंगे: सीजेपी
नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) अभिजीत दीपके के नेतृत्व में शनिवार को जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने चेतावनी दी कि यदि मंत्री को बर्खास्त नहीं किया गया या वे स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में कई राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लिया और यह शिक्षा और शासन के मुद्दों पर केंद्रित एक व्यापक युवा आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक है।
मई में एक ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू हुई सीजेपी ने युवाओं से परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आग्रह किया था, जो शक्ति प्रदर्शन का एक स्पष्ट तरीका था। सीजेपी के इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं।
रांका ने कहा, “हम सरकार को सात दिन का समय दे रहे हैं। या तो धर्मेंद्र प्रधान सम्मानपूर्वक इस्तीफा दे दें, या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें बर्खास्त कर दें। अगर सात दिनों के भीतर उनका इस्तीफा नहीं आता है, तो यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।”
उन्होंने कहा कि आयोजकों को विभिन्न राज्यों में समर्थकों से संदेश मिल रहे हैं जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का इरादा व्यक्त किया गया है, और दावा किया कि समूह अपनी अगली कार्रवाई की घोषणा करने से पहले एक सप्ताह तक इंतजार करेगा।
शनिवार को एकत्र भीड़ को एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए, रांका ने कहा कि विरोध प्रदर्शन ने यह प्रदर्शित किया कि युवा लोग उन मुद्दों के इर्द-गिर्द एकजुट होने को तैयार हैं जो उन्हें प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा, “6 जून, 2026 का दिन इतिहास में दर्ज होगा क्योंकि आज इस देश की राजनीति पूरी तरह से बदल गई है।” उन्होंने कहा कि कई युवा, जिन्हें अक्सर सड़कों पर उतरने से हतोत्साहित किया जाता था, एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए एक साथ आए थे।
आयोजकों ने बार-बार इस विरोध प्रदर्शन को युवाओं के नेतृत्व वाले अभियान के रूप में पेश किया और इसे शिक्षा प्रणाली से जुड़ी चिंताओं के जवाब के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।
रांका ने कहा, “हमारे शिक्षा तंत्र को फिर से व्यवस्थित करने का समय आ गया है, और हमने आज से यह व्यवस्था शुरू कर दी है।” उन्होंने कहा कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस आंदोलन का तात्कालिक केंद्र बिंदु है।
उनके अनुसार, सार्थक सुधार लाने के लिए शिक्षा मंत्री को हटाना आवश्यक था।
उन्होंने कहा, “जब तक यह शिक्षा मंत्री पद पर हैं, हम देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं कर पाएंगे।”
रांका ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि इस्तीफे की मांग सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अभियान इस मुद्दे से आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, “यह तो बस शुरुआत है। इस देश के युवाओं की अनगिनत समस्याएं हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा से संबंधित चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस लामबंदी को विरोध, आंदोलन या राजनीतिक मंच के रूप में देखा जाना चाहिए, तो रांका ने इसे “युवाओं के लिए एक मंच”, “युवाओं के लिए एक समूह” और “युवाओं के लिए एक आंदोलन” के रूप में वर्णित किया, जबकि भविष्य में इसके संभावित विकास को लेकर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
आयोजकों ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि यह आंदोलन किसी स्थापित राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है और उन्होंने संगठन को “युवा समर्थक, शिक्षा समर्थक, संविधान समर्थक और भारत समर्थक” बताया।
रांका ने दावा किया कि उपस्थिति उम्मीद से कहीं अधिक थी और इस बात पर जोर दिया कि भीड़ के बावजूद सभा शांतिपूर्ण रही।
उन्होंने कहा, “वहां इतनी बड़ी भीड़ थी, फिर भी यह एक बेहद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन रहा। शायद यह देश में हाल के सबसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में से एक था।”
उन्होंने कहा, “इस देश की पीढ़ी और युवाओं के खून में गांधी और आंबेडकर बसे हुए हैं।”
सौरभ दास ने कहा कि तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर सहित कई राज्यों के लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
उन्होंने अभियान के लिए ऑनलाइन समर्थन का भी जिक्र किया और दावा किया कि लाखों लोगों ने मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली याचिकाओं पर हस्ताक्षर किए हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रधान को कोई ज्ञापन भेजेंगे या उनसे मिलने का अनुरोध करेंगे, तो रांका ने कहा, “वह खुद इस्तीफा क्यों नहीं दे देते?”
दास ने कहा, “युवा बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन जब सरकार बात नहीं करती, तभी वे सड़कों पर उतरते हैं।”
इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान दीपके ने किया था, जिन्होंने शिक्षा क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर जवाबदेही की मांग के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का ऑनलाइन व्यंग्यात्मक खाता शुरू किया था।
दिन की शुरुआत में, दीपके ने प्रधान से शाम 5 बजे तक पद छोड़ने का आग्रह किया था, जिसके बाद आयोजकों ने मंत्री या सरकार द्वारा कार्रवाई के लिए सात दिन की समय सीमा की घोषणा की।
भाषा प्रशांत संतोष
संतोष

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