अवैध खनन: न्यायालय ने राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया
अवैध खनन: न्यायालय ने राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ‘‘प्रशासनिक उदासीनता और संस्थागत निष्क्रियता’’ को लेकर राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बृहस्पतिवार को उसके कई शीर्ष अधिकारियों को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया ताकि वे अवैध रेत खनन गतिविधियों को रोकने संबंधी निर्देशों के अनुपालन में उठाए गए कदमों की जानकारी दे सकें।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राजस्थान सरकार का रवैया इस मामले में ‘‘पूरी तरह लापरवाहपूर्ण, उदासीन और निष्क्रिय’’ दिखाई देता है। यह मामला बड़े पैमाने पर अवैध खनन, अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति और राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के भीतर संरक्षित वन्यजीव आवासों के विनाश से संबंधित है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है। कुल 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण तीनों राज्यों का संरक्षित क्षेत्र है।
विलुप्तप्राय घड़ियाल के अलावा यह ‘रेड क्राउन्ड रूफ’ प्रजाति के कछुए और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन का भी पर्यावास है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास चंबल नदी पर स्थित यह अभयारण्य सर्वप्रथम 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित एक लंबा और संकरा अभयारण्य है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा’ शीर्षक वाले स्वतः संज्ञान मामले में यह आदेश पारित किया।
इसने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्थान के खनन और भूविज्ञान, वित्त, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन और परिवहन और सड़क सुरक्षा विभागों के प्रधान सचिवों को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से इसके समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
पीठ ने मध्य प्रदेश के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव को भी अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया। इसने साथ ही, उन्हें एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें उन चिंताओं के बारे में विशेष रूप से जवाब दिया जाए कि खनन और परिवहन गतिविधियों में कथित रूप से लगे वाहनों का बिना नंबर प्लेट के परिचालन हो रहा है।
पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में यह भी बताया जाए कि दोषी अधिकारियों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई शुरू की गई है, यदि कोई की गई हो तो।
इसने कहा कि साथ ही, निश्चित समय-सीमा के भीतर लागू किए जाने वाले सुधारात्मक और निवारक उपायों का भी उल्लेख किया जाए।
इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर 17 अप्रैल को मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया था कि वे ऐसे खनन कार्यों में अक्सर इस्तेमाल होने वाले रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाएं। न्यायालय ने कहा कि वह ‘मूक दर्शक’ नहीं बना रह सकता।
बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में, पीठ ने कहा कि जब 11 मई को मामले की सुनवाई हुई तो उसे सूचित किया गया था कि केवल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश ने ही उसके दो अप्रैल और 17 अप्रैल के निर्देशों के अनुसार अनुपालन हलफनामे दाखिल किए हैं।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश

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