केरल में अवैध पेड़ कटाई का मामला: एनजीटी ने वन अधिकारियों समेत अन्य को नोटिस जारी किया

केरल में अवैध पेड़ कटाई का मामला: एनजीटी ने वन अधिकारियों समेत अन्य को नोटिस जारी किया

केरल में अवैध पेड़ कटाई का मामला: एनजीटी ने वन अधिकारियों समेत अन्य को नोटिस जारी किया
Modified Date: July 19, 2026 / 05:11 pm IST
Published Date: July 19, 2026 5:11 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केरल के चलाकुडी वन प्रभाग में एक राजमार्ग के लिए सागौन के करीब 273 पेड़ों की कथित रूप से अवैध कटाई और बिक्री के मामले में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक समेत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

हरित अधिकरण उस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने एक समाचार पत्र की एक खबर पर स्वत: संज्ञान लिया था। खबर में आरोप लगाया गया था कि वेल्लिकु लंगारा जंक्शन से वेट्टिला पाला पुल तक 18 किलोमीटर लंबे हिस्से में पेड़ों की अवैध कटाई की गई। खबर के अनुसार, ये पेड़ निजी स्वामित्व वाली और आवंटित भूमि पर स्थित थे, लेकिन इन्हें काटकर कम कीमत पर एक लकड़ी आधारित औद्योगिक इकाई को बेच दिया गया।

हाल में उपलब्ध कराए गए आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि खबर के अनुसार, त्रिशूर के सहायक वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) ने लकड़ी का मूल्य 41.55 लाख रुपये आंका था, जबकि पेड़ों को कथित तौर पर केवल 8.52 लाख रुपये में बेच दिया गया।

अधिकरण ने केरल गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष वृद्धि प्रोत्साहन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कटे हुए पेड़ों के परिवहन के लिए वन रेंज अधिकारी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) से संबंधित रिपोर्ट का भी उल्लेख किया।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, अधिनियम में प्रावधान है कि परिवहन पास केवल उन्हीं पेड़ों के लिए जारी किया जाएगा, जिन्हें उस भूमि के मालिक द्वारा कानूनी रूप से काटा गया हो, जहां वे स्थित हैं। लेकिन त्रिशूर वन प्रभाग के वन अधिकारी ने उल्लंघनों का उल्लेख किया है और मामला जांच के अधीन है। यह स्पष्ट नहीं है कि पेड़ों की कटाई और क्षतिपूरक वनीकरण के संबंध में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।’’

अधिकरण ने कहा कि यह मामला वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन की ओर संकेत करता है और समाचार में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़े ‘‘महत्वपूर्ण मुद्दे’’ उठाए गए हैं।

एनजीटी ने मामले में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एवं वन बल प्रमुख (एचओएफएफ), मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बेंगलुरु स्थित एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय को पक्षकार बनाया है।

अधिकरण ने कहा, ‘‘उपरोक्त प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाता है कि वे अगली सुनवाई (31 अगस्त) से कम से कम एक सप्ताह पहले अधिकरण की दक्षिणी क्षेत्रीय पीठ के समक्ष हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें।’’

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत


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