गुमशुदा मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें, तस्करी रोधी इकाई को सक्रिय करें : न्यायालय

गुमशुदा मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें, तस्करी रोधी इकाई को सक्रिय करें : न्यायालय

गुमशुदा मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें, तस्करी रोधी इकाई को सक्रिय करें : न्यायालय
Modified Date: May 22, 2026 / 07:33 pm IST
Published Date: May 22, 2026 7:33 pm IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारत में 47 हजार बच्चों के अब भी लापता होने के आंकड़ों पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को देश भर के पुलिस अधिकारियों को गुमशुदगी के मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया और कहा कि मानव तस्करी रोधी इकाइयों को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह से सक्रिय किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए लापता बच्चों के मामलों की संख्या में वृद्धि पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि वे अक्सर संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों के शिकार होते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘भारत सरकार के गृह मंत्रालय को निर्देश दिया जाता है कि वह देश के प्रत्येक पुलिस थाने को एक ही मंच से जोड़ने वाला एक अखिल भारतीय नेटवर्क स्थापित करे, जिसमें लापता बच्चों और महिलाओं सहित मानव तस्करी के लिए समर्पित एक विशेष पोर्टल होगा।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा, “संबंधित पुलिस थानों को निर्देश दिया जाता है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही, प्रारंभिक जांच की प्रतीक्षा किए बिना या लापता व्यक्तियों के अभिभावकों पर मामला छोड़े बिना, तुरंत प्राथमिकी दर्ज करें… उक्त प्राथमिकी में अपहरण/तस्करी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।’’

पीठ ने कहा कि जब भी कोई बच्चा लापता हो जाता है, तो अधिकारियों को शुरू से ही अपहरण या अगवा होने की आशंका के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अपहरण के लिए दंड प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों को दर्ज करने से जांच में गंभीरता सुनिश्चित होगी और देरी से बचा जा सकेगा।

पीठ ने निर्देश दिया कि जिन बच्चों का पता लगाया जाता है, उन्हें आमतौर पर 24 घंटों के भीतर उनके परिवारों को सौंप दिया जाना चाहिए, बशर्ते इस बात के संकेत न हों कि परिवार स्वयं तस्करी या शोषण में संलिप्त था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘किसी भी व्यक्ति को बरामद या बचाये जाने के तुरंत बाद, उसे आधार सत्यापन या आधार कार्ड बनवाने के लिए ले जाया जाना चाहिए। यह निर्देश इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए उंगलियों के निशान और अन्य बायोमेट्रिक्स लिए जाते हैं।’’

ये निर्देश जी गणेश द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका पर पारित किए गए थे, जिनकी बेटी 19 सितंबर, 2011 को चेन्नई से लापता हो गई थी।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


लेखक के बारे में