ओडिशा में मौसम विभाग ने कई जिलों में शीत लहर की चेतावनी जारी की
ओडिशा में मौसम विभाग ने कई जिलों में शीत लहर की चेतावनी जारी की
भुवनेश्वर, आठ जनवरी (भाषा) ओडिशा के मयूरभंज जिले के सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान में पारा शून्य डिग्री सेल्सियस तक गिर गया जबकि मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बृहस्पतिवार को राज्य के कई जिलों में शीत लहर की चेतावनी जारी कर दी है।
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक यूएस दास ने ‘एक्स’ पर बताया कि भुवनेश्वर में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो तीन जनवरी, 1952 को दर्ज किए गए रात के न्यूनतम तापमान के बराबर था।
दास के अनुसार, भुवनेश्वर में जनवरी की सबसे ठंडी रात पांच जनवरी 1992 को दर्ज की गई थी जब पारा 8.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था। इसके बाद 17 जनवरी 2003 को नौ डिग्री सेल्सियस और 15 जनवरी 2012 को 9.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था।
दास ने बताया, ‘ओडिशा की राजधानी में मात्र चार दिनों के भीतर तापमान में 9.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई।’
उन्होंने कहा कि चार जनवरी 2026 को शहर का न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने बताया कि उपर बारा कामुदा (यूबीके) में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
आईएमडी ने नौ जनवरी की सुबह तक जगतसिंहपुर, कटक, बालासोर, खुर्दा, अंगुल, झारसुगुड़ा, क्योंझर, ढेंकनाल, सुंदरगढ़, कालाहांडी, कंधमाल, सोनपुर और नबरंगपुर में शीत लहर की चेतावनी जारी की।
आईएमडी के मुताबिक जी उदयगिरि में रात का तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस, सिमिलिगुडा में 3.2 डिग्री, फुलबनी में पांच डिग्री, राउरकेला में 5.4 डिग्री, झारसुगुड़ा में 5.8 डिग्री और दरिंगबाड़ी में छह डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।
वहीं भवानीपटना और नबरंगपुर में सात डिग्री, किरी में 7.2 डिग्री, चिपलिमा में 7.5 डिग्री, अंगुल में 7.8 डिग्री, तथा क्योंझर और सुंदरगढ़ में आठ डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।
इसके अलावा रानीताल में 8.6 डिग्री, ढेंकनाल में 8.9 डिग्री, बोलांगीर में 9 डिग्री, भुवनेश्वर में 9.4 डिग्री, बालासोर में 9.5 डिग्री, कटक, कोरापुट और रायगड़ा में 9.6 डिग्री, सोनपुर में 9.9 डिग्री तथा संबलपुर और महिसापता में पारा 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि राज्य भर में जारी शीत लहर ने लोगों को काफी प्रभावित किया है, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखा गया है।
भाषा प्रचेता प्रशांत
प्रशांत

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