राज्यसभा में कांग्रेस ने सरकार पर लगाया कथनी और करनी में अंतर का आरोप

राज्यसभा में कांग्रेस ने सरकार पर लगाया कथनी और करनी में अंतर का आरोप

राज्यसभा में कांग्रेस ने सरकार पर लगाया कथनी और करनी में अंतर का आरोप
Modified Date: February 2, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: February 2, 2026 4:09 pm IST

नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) सरकार पर कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कांग्रेस ने सत्ता पक्ष से जानना चाहा कि उसके द्वारा किया गया कौन सा वादा पूरा किया गया?

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा ले रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार ने ‘सबका साथ सबका विकास’ कहा, 2019 में इसमें ‘सबका विश्वास’ विश्वास जोड़ दिया और अब इसमें ‘सबका प्रयास’ जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा ‘‘मैं जानना चाहता हूं कि क्या सबका साथ, सबका विकास में मुस्लिम, इसाई, दलित, आदिवासी शामिल हैं? आप जो कह रहे हैं, उससे आपकी नीतियां बिल्कुल अलग हैं।’’

सिंह ने दावा किया कि न प्रधानमंत्री को सबका साथ मिला, न उन्होंने सबका विकास किया। उन्होंने सवाल किया ‘‘देश में सामाजिक सौहार्द की जरूरत है लेकिन सामाजिक सौहार्द कहां है? क्या सबको साथ में लेकर चला जा रहा है? धर्म देख कर बुलडोजर से घर गिराया जा रहा है। दोषी का कसूर होता है, लेकिन उसके परिवार का क्या कसूर होता है?’’

उन्होंने सोनम वांगचुक का नाम लिए बिना उनके मामले का जिक्र किया और कहा कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आज है क्योंकि आवाज उठाने पर सजा मिलती है।

सिंह ने कहा कि चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का जो विषय कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दूसरे सदन में उठाने का प्रयास किया था, प्रधानमंत्री को उसका जवाब देना चाहिए।

देश में आर्थिक असमानता बढ़ने का दावा करते हुए सिंह ने कहा कि भारत में दस व्यक्ति 58 फीसदी संपत्ति पर हक रखते हैं और यह वाक्य ही अपने आप में बहुत कुछ कहता है।

उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत के लोग जितना कर देते हैं, उससे कहीं अधिक कर आम आदमी भर रहा है, लेकिन फायदा आम आदमी को नहीं बल्कि कारपोरेट जगत के लोगों को हो रहा है।

सिंह ने कहा कि आज अनुसूचित जाति जनजाति के लोग परेशान हैं, उनकी रिक्तियां लंबित हैं, उन्हें भरा नहीं गया है। ‘‘संवैधानिक अधिकारों को कम किया जा रहा है लेकिन हमारे मूलभूत अधिकारों को हल्का नहीं करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि काला धन वापस लाने, नकली नोटों का चलन बंद होने, आतंकवाद समाप्त होने के वादे धरे रह गए। उन्होंने पूछा कि रोजगार कहां हैं, रोजगार लगातार घट रहे हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है। ‘‘भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा भी केवल वादा ही रहा। किसानों की आमदनी बढ़ाने का वादा था, आमदनी नहीं बढ़ी। किसानों के एमएसपी की गारंटी का वादा भी अधूरा है। सत्ता पक्ष बताए कि क्या सरकार ने अपना एक भी वादा पूरा किया है, अगर किया है तो वह कौन सा वादा है?’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश के लोकतंत्र पर खतरा है क्योंकि आजादी के बाद देश में जो सौहार्दपूर्ण माहौल बनाया गया था वह धीरे धीरे खत्म किया जा रहा है और कट्टरपंथी ताकतें धीरे धीरे हावी हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत जहां फलफूल रहा है वहीं गांवों में मजदूरों की मजदूरी ही नहीं बढ़ पाई। यहां तक कि मनरेगा में उनके लिए राहत थी जो आज खत्म कर दी गई है।

भाषा

मनीषा माधव

माधव


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