लखीमपुर खीरी और वाराणसी में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित, कई इलाकों में जलभराव
लखीमपुर खीरी और वाराणसी में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित, कई इलाकों में जलभराव
लखीमपुर खीरी/वाराणसी (उप्र), एक सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और वाराणसी जिलों में लगातार बारिश के कारण भारी जलभराव हो गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस कारण मंगलवार को आठवीं कक्षा तक के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
लखीमपुर खीरी में लगातार बारिश के कारण खासकर ग्रामीण इलाकों में जलभराव हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) प्रवीण तिवारी ने सोमवार देर रात जारी आदेश में भारी बारिश, जलभराव और आगे भी बारिश की संभावना को देखते हुए मंगलवार को कक्षा आठ तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया।
शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से मैलानी-नानपारा रेलखंड पर ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि भीरा और पलिया कलां रेलवे स्टेशनों के बीच मैलानी-नानपारा मीटरगेज रेलखंड पर पानी का रिसाव हो गया है। इसके चलते मैलानी, बिछिया और नानपारा के बीच चलने वाली करीब आधा दर्जन ट्रेनों की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी।
नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। निघासन तहसील के तिकुनिया क्षेत्र में मोहना और करनाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों नदियां नेपाल से निकलती हैं और इनके जलस्तर में वृद्धि से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाकों सहित खीरी के कई सीमावर्ती गांव प्रभावित होते हैं।
तिकुनिया क्षेत्र के जसनगर गांव में मोहना और करनाली नदियां गिरिजा बैराज के दाहिने प्रवाह बांध के करीब और समानांतर बह रही हैं। इसके मद्देनजर सिंचाई विभाग ने बाढ़ नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए हैं।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, मंगलवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.28 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 70.26 मीटर से ऊपर है। खतरे का निशान 71.262 मीटर है। वाराणसी में गंगा का अब तक का उच्चतम जलस्तर 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। आयोग के अनुसार, नदी का जलस्तर 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है।
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, सुबह और दोपहर में हुई बारिश के कारण नदी का प्रवाह और बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों की कई गलियों में अब नावों का परिचालन किया जा रहा है।
पारंपरिक दाह संस्कार क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर शवों का अंतिम संस्कार गलियों और छतों पर भी किया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने कहा कि गंगा के बढ़ते जलस्तर और वरुणा नदी के किनारे के क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, वरुणा के किनारे जलभराव से प्रभावित कई परिवारों को एहतियात के तौर पर पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर बाढ़ राहत शिविरों में भेज दिया गया था।
भाषा सं जफर मनीषा रंजन
रंजन

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