मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मामला: निर्वाचन आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मामला: निर्वाचन आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मामला: निर्वाचन आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
Modified Date: January 21, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: January 21, 2026 10:06 pm IST

कोलकाता, 21 जनवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से दो जिलों में मतदाता सूचियों में अवैध रूप से नाम जोड़ने के आरोप में राज्य सरकार के चार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

निर्वाचन आयोग ने इससे पहले सिफारिश की थी कि मतदाता सूची पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) देबोत्तम दत्ता चौधरी और बिप्लब सरकार तथा सहायक ईआरओ तथागत मंडल और सुदीप्तो दास को निलंबित किया जाए। साथ ही, कथित अनियमितताओं के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए।

आरोप है कि चारों अधिकारियों ने पूर्वी मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों में मतदाताओं के नाम अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल किए।

मुख्य सचिव को लिखे पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘…आपसे अनुरोध है कि आयोग के दिनांक 05.08.2025 के पत्र का संज्ञान लें, जिसमें संबंधित ईआरओ/एईआरओ के निलंबन और उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।’’

आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘राज्य के शीर्ष अधिकारी को 24 जनवरी को शाम 5 बजे तक यह बताने को कहा गया है कि निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।’’

आयोग ने पूर्व में अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि, पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत ने निर्देशों पर कथित तौर पर अमल नहीं किया।

निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने कहा, ‘‘बार-बार आदेश देने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। हमने संबंधित जिलाधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए कहा है।’’

इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने झाड़ग्राम में एक सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य सरकार के अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है।

राज्य के गृह विभाग के विशेष आयुक्त ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पत्र लिखकर प्राथमिकी से संबंधित निर्देश वापस लेने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि यह ‘‘मामूली गलती के लिए बड़ी सजा’’ होगी।

खबरों के मुताबिक, सीईओ ने पत्र कथित तौर पर दिल्ली भेज दिया, लेकिन आयोग अपने रुख पर अडिग रहा और जोर देकर कहा, ‘‘चुनावी कानून के कार्यान्वयन में किसी भी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।’’

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद से पहले, निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को अधिकारियों को निलंबित करने, विभागीय जांच करने और मतदाता सूची में कथित तौर पर ‘‘फर्जी मतदाताओं’’ को शामिल करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

आयोग ने उस समय कहा था, ‘‘मतदाता सूचियों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जानी चाहिए।’’

भाषा सुभाष माधव

माधव


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