Katha Vachak Yuvraj Pandey News: छत्तीसगढ़ में डाकुओं को भी मिलती है सुरक्षा!.. इस मंत्री का बड़ा बयान, कथावाचक युवराज से जुड़ा है मामला..

Katha Vachak Yuvraj Pandey Security Concern: पंडित युवराज के इस दावे के बाद कई गंभीर सवाल उठने लगे है। क्या छत्तीसगढ़िया कथावाचकों की जानबूझकर अनदेखी होती है? क्या आयोजन की पूर्व सूचना के बाद भी स्थानीय या छत्तीसगढ़िया कथावाचकों के पंडालों को पर्याप्त सुरक्षा और तवज्जो नहीं दी जाती?

Katha Vachak Yuvraj Pandey News: छत्तीसगढ़ में डाकुओं को भी मिलती है सुरक्षा!.. इस मंत्री का बड़ा बयान, कथावाचक युवराज से जुड़ा है मामला..

Katha Vachak Yuvraj Pandey Security || Image- Pt. Yuvraj Pandey Instagram

Modified Date: January 24, 2026 / 02:40 pm IST
Published Date: January 24, 2026 2:28 pm IST
HIGHLIGHTS
  • युवराज पांडेय की सुरक्षा पर सियासत
  • मंत्री राजेश अग्रवाल का बड़ा बयान
  • स्थानीय कथावाचकों की अनदेखी का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त कथा वाचक युवराज पांडेय की सुरक्षा को लेकर चर्चा गर्म है। (Katha Vachak Yuvraj Pandey Security) इस पूरे मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का बड़ा बयान सामने आया है।

कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने खुद की सरकार को सनातनियों की सरकार बताया है। कथावाचक को सुरक्षा नहीं दिए जाने के सवाल पर राजेश अग्रवाल ने कहा है कि, हमारी सनातन की सरकार है, सुरक्षा कैसे नहीं मिलेगी? हमारे गृहमंत्री कहते हैं संतों को पलकों में बैठाकर लाएंगे। राजेश अग्रवाल ने आगे कहा कि, हम तो डाकुओं को सुरक्षा दे देते हैं, फिर ये तो साधु संत है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इन दिनों पं युवराज पांडे की कथा राजधानी रायपुर के खिलौरा ग्राउंड में चल रही है, 19 जनवरी से शुरू हुई इस कथा में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं, लेकिन प्रशासन को सूचित करने के बाद भी भीड़ के हिसाब से सुरक्षा व्यवस्था ना मिलने पर पं युवराज ने मंच से भावुक होकर अपनी चिंता जाहिर की। (Katha Vachak Yuvraj Pandey Security) पं युवराज ने सबसे बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्या स्थानीय या छत्तीसगढ़िया होने के कारण प्रशासन गंभीर नहीं विपक्ष ने पं युवराज की मांग का समर्थन करते हुए इशारों-इशारों में बाहरी बाबाओं को ज्यादा महत्व देने का आरोप लगाया। जिस पर बीजेपी ने भी जमकर पलटवार किया।

हालांकि, पं युवराज के वीडियो वायरल होने का असर भी दिखा। प्रशासन ने पंडाल के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी है। सवाल ये है कि क्या स्थानीय या छत्तीसगढ़िया होने के चलते बड़े धार्मिक आयोजन की पूर्व सूचना पर भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी जाती है, क्या अन्य राज्यों से आने वाले ख्यात कथावाचकों को ज्यादा महत्व और व्यवस्थाएं दी जाती हैं?

बता दें कि, पंडित युवराज के इस दावे के बाद कई गंभीर सवाल उठने लगे है। क्या छत्तीसगढ़िया कथावाचकों की जानबूझकर अनदेखी होती है? क्या आयोजन की पूर्व सूचना के बाद भी स्थानीय या छत्तीसगढ़िया कथावाचकों के पंडालों को पर्याप्त सुरक्षा और तवज्जो नहीं दी जाती? आरोप तो ये भी हैं कि कुछ बाहरी बाबाओं की आवभगत में प्रोटोकॉल के उलट शासन की सुविधाओं का बेजा इस्तेमाल तक होता है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

A journey of 10 years of extraordinary journalism.. a struggling experience, opportunity to work with big names like Dainik Bhaskar and Navbharat, priority given to public concerns, currently with IBC24 Raipur for three years, future journey unknown

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