क्षेत्रीय दलों की आय में 2024-25 में 52 प्रतिशत की गिरावट, 21 प्रतिशत ने आय से अधिक खर्च किया: एडीआर

क्षेत्रीय दलों की आय में 2024-25 में 52 प्रतिशत की गिरावट, 21 प्रतिशत ने आय से अधिक खर्च किया: एडीआर

क्षेत्रीय दलों की आय में 2024-25 में 52 प्रतिशत की गिरावट, 21 प्रतिशत ने आय से अधिक खर्च किया: एडीआर
Modified Date: May 28, 2026 / 04:34 pm IST
Published Date: May 28, 2026 4:34 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) छत्तीस क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की संयुक्त आय 2024-25 में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 51 प्रतिशत से अधिक घट गई, जबकि उनमें से 21 दलों ने अपनी घोषित आय से अधिक खर्च किया। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

यह रिपोर्ट 27 मई को जारी की गई और इसमें 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से 36 दलों के ऑडिट हो चुके खातों का विश्लेषण किया गया, जिनकी वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध थी।

इसमें यह उल्लेख किया गया कि शेष 31 दलों ने 31 अक्टूबर, 2025 की समय सीमा के 207 दिन बाद भी अपनी लेखापरीक्षा रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई थी।

एडीआर के विश्लेषण के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में 36 क्षेत्रीय दलों की कुल आय 1,192.94 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 2,463.17 करोड़ रुपये की तुलना में 1,270.23 करोड़ रुपये या 51.57 प्रतिशत की गिरावट है।

रिपोर्ट के अनुसार हालांकि, इन दलों द्वारा घोषित कुल व्यय 1,433.07 करोड़ रुपये तक पहुंच गया जो उनकी संयुक्त आय से 240.12 करोड़ रुपये या लगभग 20 प्रतिशत अधिक था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन दलों का विश्लेषण किया गया उनमें से शीर्ष पांच दलों का कुल आय में लगभग 69 प्रतिशत और कुल व्यय में 77 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा था।

क्षेत्रीय दलों में, सबसे अधिक आय तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) द्वारा घोषित की गई, जो 228.31 करोड़ रुपये थी और कुल आय का 19.14 प्रतिशत थी। इसके बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की 219.35 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस 140.39 करोड़ रुपये के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रही।

खर्च के मामले में, वाईएसआर कांग्रेस ने सबसे अधिक 340.20 करोड़ रुपये खर्च किए, उसके बाद बीजू जनता दल (बीजद) ने 288.44 करोड़ रुपये और तृणमूल कांग्रेस ने 227.59 करोड़ रुपये खर्च किए।

एडीआर रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि 36 दलों में से 21 दलों ने वर्ष के दौरान अपनी अर्जित आय से अधिक खर्च किया।

वाईएसआर कांग्रेस ने सबसे अधिक अतिरिक्त व्यय दर्ज किया, जिसने अपनी आय से 199.82 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए, जो उसकी आय के मुकाबले 142.33 प्रतिशत अधिक है।

तृणमूल कांग्रेस, बीआरएस, बीजद, जद (यू) और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने भी अपनी आय से अधिक खर्च की सूचना दी।

रिपोर्ट के अनुसार तेदेपा के पास सबसे अधिक 166.98 करोड़ रुपये का अधिशेष था, इसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पास 36.27 करोड़ रुपये और अन्नाद्रमुक के पास 35.86 करोड़ रुपये का अधिशेष था।

स्वैच्छिक चंदा क्षेत्रीय दलों के लिए धन का सबसे बड़ा स्रोत बना रहा। चंदे और अंशदान से प्राप्त राशि 702.36 करोड़ रुपये या कुल आय का 58.88 प्रतिशत थी। तृणमूल को सबसे अधिक 184.08 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसके बाद वाईएसआर कांग्रेस को 140.05 करोड़ रुपये और तेदेपा को 85.20 करोड़ रुपये का चंदा मिला। ब्याज से प्राप्त आय का योगदान 277.21 करोड़ रुपये रहा, जो कुल आय का 23.24 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार चुनाव व्यय और प्रशासनिक व्यय सबसे आम व्यय मद बने रहे। पंद्रह क्षेत्रीय दलों ने अपने कुल खर्च का 55 प्रतिशत से अधिक चुनाव प्रचार पर खर्च किया। अकेले वाईएसआर कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर 299.92 करोड़ रुपये खर्च किए, उसके बाद बीजद ने 270.66 करोड़ रुपये और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने 147.99 करोड़ रुपये खर्च किए।

एडीआर ने बताया कि द्रमुक, शिवसेना, शिवसेना (उबाठा), राकांपा और जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे प्रमुख दलों समेत 31 क्षेत्रीय दलों ने रिपोर्ट तैयार करते समय तक वित्त वर्ष 2024-25 की अपनी ऑडिट रिपोर्ट निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की थी।

भाषा देवेंद्र नरेश

नरेश


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