नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि युवा विधि पेशेवरों को एक-दूसरे के देश भेजने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने भूटान की शीर्ष अदालत के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
कामकाज की शुरुआत में, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस एमओयू के तहत भूटान के दो विधि लिपिकों को यहां के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन महीने की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लिपिकों को भारतीय विधि लिपिकों के समान मानदेय दिया जाएगा और उनके यात्रा खर्च का वहन उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
खचाखच भरे न्यायालय कक्ष में विधि लिपिकों का परिचय कराते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने उन्हें ‘युवा व प्रतिभाशाली’ बताया और कहा कि उन्हें उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न न्यायालयों में कार्य करने के लिए नियुक्त किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘हमने भूटान के उच्चतम न्यायालय के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके आधार पर दो विधि लिपिक नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें भारतीय विधि लिपिकों के समान मानदेय के आधार पर भुगतान किया जाएगा और वे तीन महीने की अवधि के लिए वहां रहेंगे। हम उनकी यात्रा का खर्च वहन करेंगे। दोनों अलग-अलग न्यायालयों में कार्य करेंगे और दोनों ही बहुत प्रतिभाशाली हैं।’
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत बनाना और संस्थागत संबंधों को बढ़ावा देना है।
भाषा जोहेब मनीषा
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