साइबर स्कैम केंद्रों के मुद्दे पर चिंताओं के बीच भारत और कंबोडिया के अधिकारियों की बैठक
साइबर स्कैम केंद्रों के मुद्दे पर चिंताओं के बीच भारत और कंबोडिया के अधिकारियों की बैठक
नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) भारत और चीन के मध्य क्षेत्र में स्थित ‘इंडो-चाइना’ देशों में ‘‘साइबर स्लेवरी फार्म’’ केंद्रों में साइबर अपराधियों के काम करने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंताओं के बीच, भारत और कंबोडिया के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर ‘‘भविष्य में सहयोग और आपसी हित के क्षेत्रों’’ पर बात करने के लिए एक बैठक की।
अधिकारियों ने बताया कि भारत की प्रमुख साइबर अपराध रोधी एजेंसी आई4सी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कंबोडिया में चीफ ऑफ द कमीशन फॉर कॉम्बैटिंग ऑनलाइन स्कैम (सीसीओएस) और वरिष्ठ मंत्री शांतिबिंदित छाय सिनारिथ से मुलाकात की।
नोम पेन्ह में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ मंत्री और राजदूत वनलालवना बावितलुंग ने की, जहां दोनों पक्षों ने आपसी हितों के विषयों और भविष्य में सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा की।’’
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कंबोडियाई गृह मंत्रालय के तहत साइबर अपराध रोधी विभाग के निदेशक जनरल सोक नित्या से भी मुलाकात की।
केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों पर ध्यान दिया है जहां संदिग्ध कंपनियां भारतीयों को, ज़्यादातर सोशल मीडिया के ज़रिए, कंबोडिया, म्यांमा और लाओ पीडीआर सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में नौकरी के फर्जी प्रस्ताव देकर लुभाती हैं, और उन्हें वहां चल रहे ‘स्कैम सेंटर’ से साइबर अपराध और दूसरी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करती हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंबोडिया से संचालित ‘साइबर स्लेवरी फार्म’ में रखे गए सॉफ्टवेयर इंजीनियरों सहित 2,265 से ज़्यादा भारतीयों को दिसंबर 2025 तक बचाया गया।
‘साइबर स्लेवरी फार्म’ ऐसे बंद परिसर होते हैं जहां मानव तस्करी या अन्य ऐसी अनुचित गतिविधियों के माध्यम से लाए गए लोगों को साइबर अपराध या स्कैम करने के लिए बाध्य किया जाता है।
कंबोडिया में फंसे भारतीयों की सही संख्या का पता नहीं है, क्योंकि वे अक्सर धोखेबाज़ और बेईमान भर्ती एजेंटों और एजेंसियों के ज़रिए, तथा गैर-कानूनी चैनलों के ज़रिए अपनी मर्ज़ी से देश के इन स्कैम सेंटर तक पहुंचते हैं। सरकार ने पिछले साल दिसंबर में संसद को यह जानकारी दी थी।
सरकार ने बताया था कि जब उन्हें पता चलता है कि वे फंस गए हैं, तो वे बचाव के लिए सरकार या किसी दूसरे प्राधिकार से संपर्क करते हैं।
भाषा वैभव नरेश
नरेश

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