भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में तय होगी वैश्विक दिशा : यूरोपीय अधिकारी
भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में तय होगी वैश्विक दिशा : यूरोपीय अधिकारी
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) भारत-यूरोपीय संघ अगले सप्ताह होने वाले शिखर सम्मेलन में अशांत भू-राजनीतिक वातावरण के संदर्भ में व्यापार, रक्षा और आपूर्ति शृंखलाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तात्कालिक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक नेतृत्व का प्रदर्शन करेंगे। यूरोपीय अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 27 जनवरी को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे। यह शिखर वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के कारण उत्पन्न व्यवधानों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं की पृष्ठभूमि में हो रही है।
शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते के मुकाम पर पहुंचने की घोषणा करने, रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही के लिए एक रूपरेखा पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
कोस्टा और लेयेन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘हम एक ऐसे शिखर सम्मेलन की ओर देख रहे हैं, जिसमें दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र वैश्विक स्तर पर दो अहम किरदार हैं, जिसकी ओर से स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि हम एक साथ आएंगे, वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व दिखाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और इससे भी महत्वपूर्ण नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।
अधिकारियों में से एक ने कहा, ‘‘हम शिखर सम्मेलन से महत्वपूर्ण परिणाम मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। व्यापार, प्रतिभा, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारी ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक-दूसरे को विश्वसनीय साझेदार मानते हैं। इसलिए घनिष्ठ सहयोग न केवल तार्किक है, बल्कि आवश्यक भी है।’’
अधिकारियों ने कहा कि यूरोप के साथ अधिक निकटता से काम करने में भारत की रुचि लगातार बढ़ रही है, और दोनों पक्षों में संबंधों की समग्र दिशा का विस्तार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम हर बात पर सहमत नहीं हैं, लेकिन हमारे कुछ मूलभूत हित समान हैं, जिनमें एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का होना शामिल है।’’ उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के साथ ‘‘यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रामक युद्ध’’ पर चर्चा करने का भी एक अवसर होगा।
अधिकारियों ने बताया कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष कोस्टा इस संदेश को दोहराएंगे कि यह युद्ध यूरोप के लिए एक अस्तित्वगत खतरा है और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती पेश करता है, और इसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी स्पष्ट परिणाम हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों से अवगत हैं, और इस संदर्भ में, भारत को शांति प्रयासों के संबंध में अपने प्रभाव का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।’’
मुक्त व्यापार समझौते के साथ-साथ, 27 देशों वाला यूरोपीय संघ स्वच्छ हाइड्रोजन, सौर उपकरण, मशीनरी और विनिर्माण सहित विशिष्ट आपूर्ति शृंखलाओं में भारत के साथ निवेश और व्यापार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त उपायों पर भी विचार कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि लोगों के आवागमन संबंधी नए ढांचे के दायरे में छात्र, शोधकर्ता, श्रमिक और उच्च कुशल पेशेवर आएंगे और इस पहल का मुख्य उद्देश्य यूरोप आने वाली भारतीय प्रतिभाओं को बेहतर समर्थन देना है।
उन्होंने बताया कि रक्षा साझेदारी ढांचा रक्षा औद्योगिक सहयोग में दोनों पक्षों के बीच समन्वय को बढ़ावा देगा। दोनों पक्षों द्वारा महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी)पर भी विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध मजबूत हुए हैं।
यूरोपीय संघ, एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें निर्यात लगभग 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर था।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश


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