भारत वैश्विक निवेशकों को लिए भरोसेमंद गंतव्य बन कर उभरा है : भाजपा
भारत वैश्विक निवेशकों को लिए भरोसेमंद गंतव्य बन कर उभरा है : भाजपा
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को ‘विकसित भारत की यात्रा’ में निर्णायक मील का पत्थर बताते हुए सत्ता पक्ष ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि देश का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना स्पष्ट करता है कि यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन कर उभरा है।
उच्च सदन में बजट 2026-27 पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए भाजपा के राम भाई मोकारिया ने कहा ‘‘यह बजट ऐसे समय में आया है जब भारत विकास यात्रा पर तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भी इसे मानती है। देश का आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना बताता है कि यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन कर उभरा है।’’
उन्होंने कहा कि बजट से स्पष्ट है कि सरकार ने दीर्घकालिक विकास का मार्ग चुना है और अवसंरचना, संस्थानों एवं औद्योगिक क्षमता निर्माण में सतत निवेश को अपनाया है।
इसी पार्टी के गोविंदभाई लालजीभाई धोलकिया ने कहा कि दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि संप्रग सरकार के समय 2011 से 2014 के बीच औसत मुद्रास्फीति 9.8 प्रतिशत थी।
उन्होंने दावा किया कि युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं तथा बेरोजगारी की दर हर दिन घट रही है और आज यह 4.8 प्रतिशत है।
भाजपा के ही मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते इस बात का संकेत देते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार पर दुनिया को भरोसा है और उनके नेतृत्व में देश कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भी तेजी से काम कर रहा है।
इसी पार्टी के लहर सिंह सिरोया ने कहा कि विपक्ष एकजुट हो कर बजट की आलोचना करता है लेकिन विपक्ष शासित राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर आपस में खींचतान चल रही है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को आलोचना करने के बजाय सरकार की योजनाओं के बारे में आम लोगों को बताना चाहिए क्योंकि कई लोग अपने लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी न होने की वजह से इनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के रामदास आठवले ने कहा कि यह बजट कर्तव्य भवन में बनाया गया पहला बजट है और राजग सरकार अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह सजग है।
चर्चा में भाजपा की रमिलाबेन बेचारभाई बारा, मिथिलेश कुमार, बंसीलाल गुर्जर, दोरजी टी लेफ्चा, साधना सिंह, दिनेश शर्मा, अनिल सुखेदवराव बोंडे, सुभाष बराला, एस. फांग्नोन कोन्याक, धर्मशीला गुप्ता, किरण चौधरी और जद (यू) के खीरू महतो आदि ने भी भाग लिए।
भाषा मनीषा माधव मनीषा अविनाश
अविनाश

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