नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है भारत : विदेश मंत्री खनाल

नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है भारत : विदेश मंत्री खनाल

नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है भारत : विदेश मंत्री खनाल
Modified Date: June 6, 2026 / 10:48 pm IST
Published Date: June 6, 2026 10:48 pm IST

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को अपने नेपाली समकक्ष शिशिर खनाल के साथ एक बैठक के दौरान कहा कि भारत और नेपाल एक ‘‘विशेष’’ रिश्ता साझा करते हैं और इसकी पूरी क्षमता को साकार करने के लिए संबंधों को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

खनाल ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को भारत की तीन दिवसीय यात्रा शुरू की। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणियों से उपजे विवाद के बीच संबंधों को बेहतर बनाना है।

जयशंकर के साथ बैठक के दौरान खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ देता है और बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार नयी दिल्ली के साथ ‘‘ठोस और सार्थक’’ रूप से जुड़ने के लिए तैयार है।

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हम पुरानी बातों का बोझ नहीं उठाते और अपने करीबी पड़ोसी एवं सबसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ वास्तव में परिवर्तनकारी संबंध बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।’’

जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कथन को दोहराया कि भारत दोनों देशों की पारस्परिक समृद्धि, प्रगति और खुशहाली के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत और नेपाल के बीच एक विशेष संबंध है, जो सीमा पार संपर्क और साझा सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर आधारित है।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘यह आपसी विश्वास, सद्भावना और पारस्परिक लाभ पर आधारित है। व्यापार, वाणिज्य, निवेश, ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा, आपदा राहत और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय संबंध लगातार विकसित हुए हैं।’’

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मार्च में सत्ता संभाली थी और उनके सरकार के किसी मंत्री की यह भारत की पहली यात्रा है।

बालेंद्र शाह ने 31 मई को कहा था कि भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चर्चा के अलावा, काठमांडू चीन और ब्रिटेन के साथ भी संपर्क में है।

भारत ने हालांकि नेपाल के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।

भाषा

शफीक संतोष

संतोष


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