वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत 131वें स्थान पर बरकरार; आइसलैंड शीर्ष स्थान पर
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत 131वें स्थान पर बरकरार; आइसलैंड शीर्ष स्थान पर
नयी दिल्ली/जिनेवा, 16 सितंबर (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से बुधवार को जारी वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2026 में भारत 131वें स्थान पर बरकरार रहा, जबकि आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे क्रमशः शीर्ष तीन स्थान पर हैं।
कुल 145 देशों की सूची में भारत से नीचे केवल 14 देश हैं। इनमें पापुआ न्यू गिनी, कुवैत, ओमान, कतर, ताजिकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र, मोरक्को, माली, अल्जीरिया और कांगो शामिल हैं।
इस सूचकांक में चाड सबसे निचले पायदान पर है और ईरान एवं पाकिस्तान भी सबसे निचले तीन देशों में शामिल हैं।
जिनेवा स्थित डब्ल्यूईएफ ने कहा कि 2006 से इस सूचकांक में शामिल लगभग हर अर्थव्यवस्था ने (लैंगिक समानता) की दिशा में प्रगति की है, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि पूरी समानता हासिल करने में अभी भी 120 साल लगेंगे।
डब्ल्यूईएफ के अनुसार, दुनिया भर में लैंगिक अंतराल (प्रत्येक 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) अब 69.2 प्रतिशत तक कम हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है। 100 प्रतिशत पूर्ण समानता होती है।
दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में, जहां लगभग 1.5 अरब लोग रहते हैं, लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति 64.5 प्रतिशत रही, जो वैश्विक औसत से कम है।
हालांकि, पिछले साल की तुलना में भारत के स्कोर में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन इसकी वैश्विक रैंकिंग 131 ही बनी रही।
कुल मिलाकर, 2006 के बाद से भारत में लैंगिक समानता में 4.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण शिक्षा के स्तर में सुधार है।
आर्थिक भागीदारी एवं अवसर उप सूचकांक में, भारत का समानता स्कोर 41.2 प्रतिशत रहा। यह पिछले संस्करण से 0.5 ज़्यादा है, लेकिन 2013 में मिले सबसे अच्छे परिणाम से 3.5 प्रतिशत अंक कम है।
पेशेवर और तकनीकी कामगार के क्षेत्र में हुई जबरदस्त प्रगति की वजह से भारत में लैंगिक समानता 2006 के 26.6 प्रतिशत से दोगुनी होकर 2026 में 49.9 प्रतिशत हो गई।
वर्ष 2006 के संस्करण के बाद से जन प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों के बीच प्रतिनिधित्व में भी 10 प्रतिशत अंकों का सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी 13.1 प्रतिशत के साथ तुलनात्मक रूप से कम है।
पिछले दो दशकों में श्रमिक कार्यबल में भागीदारी की समानता में मामूली सुधार हुआ है और 2026 में यह 44.1 प्रतिशत रही।
शिक्षा के स्तर वाले उप सूचकांक में भारत का समानता स्कोर 96.6 प्रतिशत रहा, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसमें 0.5 प्रतिशत अंक की गिरावट आई।
स्वास्थ्य और जीवन रक्षा के मामले में, भारत ने पिछले साल के मुकाबले अपना स्कोर बेहतर किया है और 95.6 प्रतिशत समानता के स्तर तक पहुंच गया है।
वर्ष 2017 से सुधार के बावजूद, 2026 में जन्म के समय भारत का लिंगानुपात 2006 की तुलना में लगभग एक प्रतिशत अंक कम रहा।
वर्ष 2026 में भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन राजनीतिक सशक्तीकरण उप सूचकांक में रहा, जिसमें अंतर को 24.5 प्रतिशत तक कम किया गया और देश को वैश्विक स्तर पर 67वां स्थान मिला।
हालांकि, 2021 से इस सूचकांक का स्कोर लुढक कर मौजूदा 40.7 प्रतिशत पर आ गया है।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि अन्य संकेतक के मामले में भारत में समानता का स्तर तुलनात्मक रूप से कम रहा।
संसद में, 2026 में लैंगिक अंतराल 16.1 प्रतिशत रहा, जो 2006 के मुकाबले कुल 7 प्रतिशत अंक का सुधार है।
मंत्रियों के स्तर पर, भारत ने कुल 2.4 प्रतिशत अंकों की प्रगति की है। यह 2006 में 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 5.9 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, यह 2019 में देश के सबसे ज़्यादा स्कोर, 30 प्रतिशत, से काफी कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2006 के बाद से दुनिया भर में राजनीतिक सशक्तीकरण में सबसे ज़्यादा वृद्धि देखी गई है, लेकिन 2016 से इसमें गिरावट आ रही है।
डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी 2022 में अपने उच्चतम स्तर पर थी, लेकिन अब यह घटकर 2016 के स्तर पर आ गई है।
महिलाएं मंत्रिमंडल तक तो पहुंच गई हैं, लेकिन सर्वाधिक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव वाली भूमिकाओं में उनकी भागीदारी कम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पदों पर 19.1 प्रतिशत महिलाएं हैं।
वहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इंजीनियरों में महिलाओं की हिस्सेदारी प्रत्येक पांच में एक से भी कम है और एआई कंपनियों में हर स्तर पर उनकी भागीदारी कम है।
डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया ज़ाहिदी ने कहा, ‘‘बीस साल के डेटा से पता चलता है कि लैंगिक समानता हासिल की जा सकती है। हर तरह की अर्थव्यवस्थाओं ने प्रगति की है, इसलिए संसाधनों की कमी रूकावट नहीं है।’
शीर्ष 10 देशों में नामीबिया चार पायदान ऊपर चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंच गया है और यह उप-सहारा अफ़्रीका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला देश बन गया है। इसके बाद ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और आयरलैंड का स्थान है।
ऑस्ट्रेलिया पहली बार शीर्ष 10 में शामिल हुआ है। 2006 से अब तक चार अर्थव्यवस्थाएं हर बार शीर्ष 10 में रही हैं: आइसलैंड, फ़िनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन।
आइसलैंड एकमात्र ऐसा देश है जिसने लैंगिक अंतराल को 90 प्रतिशत से ज़्यादा (93 प्रतिशत) तक कम कर लिया है।
भाषा सुभाष मनीषा
मनीषा

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