एआई शक्ति के रूप में उभरने के लिए स्वदेशी क्षमता और नैतिक शासन को आधार बनाये भारत : विशेषज्ञ
एआई शक्ति के रूप में उभरने के लिए स्वदेशी क्षमता और नैतिक शासन को आधार बनाये भारत : विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) विशेषज्ञों ने बुधवार को दिल्ली में एक चर्चा के दौरान कहा कि वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शक्ति के रूप में उभरने के लिए भारत को स्वदेशी क्षमता और नैतिक शासन को आधार बनाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रौद्योगिकी व्यापक जनहित में काम करे।
एक बयान के अनुसार, दिल्ली स्थित थिंक टैंक भारत की सोच द्वारा आयोजित पुस्तक चर्चा श्रृंखला के तहत इस सत्र का आयोजन हुआ जिसमें इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान, विशेष रूप से अर्थशास्त्र कैसे एआई के माध्यम से उत्पन्न आधुनिक भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल युग में भारत के नेतृत्व को केवल गति से नहीं मापा जा सकता है और इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति को जन कल्याण की व्यापक दृष्टि के साथ तालमेल बिठाना होगा।
भारत की सोच के निदेशक आर. के. पचनंदा ने कहा, ‘‘भारत से वैश्विक स्तर पर शीर्ष एआई शक्तियों में से एक बनने का आह्वान किया जाता है, लेकिन यह नेतृत्व एक ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए जहां प्रौद्योगिकी केवल दक्षता के लिए नहीं बल्कि व्यापक जनहित के लिए काम करे।’’
थिंक टैंक में विजिटिंग फेलो और आगामी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र इन द एआई एज’ के लेखक वी श्रीवत्सन ने कहा, ‘‘हर सदी को एक निर्णायक तकनीक द्वारा फिर से लिखा जाता है: कांस्य ने साम्राज्यों का निर्माण किया, बारूद ने राज्यों को नया रूप दिया, भाप ने औद्योगिक शक्ति को गति दी और आज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक व्यवस्था को पुनर्गठित कर रही है।’’
इस चर्चा में उभरती वैश्विक गतिशीलताओं का भी विश्लेषण किया गया, जिसमें ‘पैक्स सिलिका’ की अवधारणा शामिल है जिसके अनुसार प्रौद्योगिकी तक पहुंच ही राष्ट्रीय शक्ति की सीमाएं निर्धारित करती है।
भाषा सुरभि रंजन
रंजन

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