वैश्विक भूजल निकासी का 25 प्रतिशत उपयोग भारत करता है जो अत्यधिक दोहन को दर्शाता है: समिति

वैश्विक भूजल निकासी का 25 प्रतिशत उपयोग भारत करता है जो अत्यधिक दोहन को दर्शाता है: समिति

वैश्विक भूजल निकासी का 25 प्रतिशत उपयोग भारत करता है जो अत्यधिक दोहन को दर्शाता है: समिति
Modified Date: April 5, 2026 / 08:55 pm IST
Published Date: April 5, 2026 8:55 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) संसद की लोकलेखा समिति ने एक रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक भूजल निकासी में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है जो पानी के अत्यधिक दोहन को दर्शाता है।

समिति ने जल शक्ति मंत्रालय से राज्यों को इस अत्यधिक दोहन पर अंकुश लगाने के लिए सहमत करने का आग्रह किया है।

ये टिप्पणियां समिति की 41वीं रिपोर्ट ‘भूजल प्रबंधन और विनियमन’ में की गई हैं। इसे समिति के अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल ने एक अप्रैल को लोकसभा में पेश किया था और उसी दिन इसे राज्यसभा में भी रखा गया था।

समिति की पिछली सिफारिशों पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत भूजल का दुनिया में सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और देश में अनुमानित रूप से 245 अरब घन मीटर (बीसीएम) जल निकाला जाता है जो वैश्विक निकासी का लगभग 25 प्रतिशत है। इससे पेयजल की लगभग 80 प्रतिशत जरूरतें तथा सिंचाई की करीब 64 प्रतिशत आवश्यकताएं पूरी होती हैं।

समिति ने भूजल संसाधन का सतत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा पहल को ठोस नतीजों में बदलने पर जोर दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘चार राज्यों में 100 प्रतिशत से अधिक जल दोहन और 267 जिलों में 64 प्रतिशत से 385 प्रतिशत तक जल दोहन की स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सतत जल उपयोग को प्राथमिकता नहीं दी गई है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘समिति मंत्रालय से आग्रह करती है कि वह राज्य सरकारों को भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने और भूजल संसाधनों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और कड़े कदम उठाने को राजी करे।’’

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में भूजल के दोहन का स्तर 100 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया, जिसका मतलब है कि भूजल निकासी, पुनर्भरण से अधिक रही। वहीं, जिला स्तर पर 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 267 जिलों में दोहन 64 प्रतिशत से 385 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया।

मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि वह भूजल के सतत प्रबंधन के लिए राज्यों के साथ समन्वय कर रहा है और जल शक्ति अभियान, अटल भूजल योजना, भूजल प्रबंधन एवं विनियमन योजना तथा राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना जैसे कार्यक्रम लागू कर रहा है।

उसने कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य एजेंसियों द्वारा भूजल संसाधनों का हाल में किया गया आकलन (2023) दर्शाता है कि भूजल दोहन का समग्र स्तर 2017 के 63.33 प्रतिशत से घटकर 2023 में 59.26 प्रतिशत रह गया।

उसने कहा कि 2022 में मानसून के बाद के जल स्तर से पता चला कि निगरानी में रखे गए करीब 61 प्रतिशत कुओं में पिछले 10 वर्षों (2012-21) के औसत की तुलना में जल स्तर बढ़ा, जो भूजल की स्थिति में शुरुआती सुधार के संकेत देता है।

मंत्रालय ने कहा कि हालांकि, ये शुरुआती संकेत ‘‘उत्साहजनक’’ हैं, लेकिन इस रफ्तार को बनाए रखने की जरूरत है और भूजल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।

भाषा सिम्मी सुभाष

सुभाष


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