राष्ट्रगीत का अपमान संयोग नहीं, सांप्रदायिक प्रयोग है : नकवी

राष्ट्रगीत का अपमान संयोग नहीं, सांप्रदायिक प्रयोग है : नकवी

राष्ट्रगीत का अपमान संयोग नहीं, सांप्रदायिक प्रयोग है : नकवी
Modified Date: August 21, 2026 / 07:30 pm IST
Published Date: August 21, 2026 7:30 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने वंदे मातरम् से जुड़े विवाद को लेकर आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में ‘जिन्ना के जिन्न’’ को जगाने में जुटी है।

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि राष्ट्रगीत का अपमान ‘‘संयोग नहीं, सांप्रदायिक प्रयोग’’ है।

उन्होंने इस बात उल्लेख किया कि कांग्रेस के 1923 के काकीनाडा अधिवेशन में स्वतंत्रता सेनानी रेहाना तैयबजी ने तत्कालीन कांग्रेस नेता मोहम्मद अली जौहर के विरोध के बावजूद वंदे मातरम् गाया था।

नकवी ने कहा कि उस समय वहां मौजूद पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने विरोध करने वालों को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह कोई धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम है तथा यहां राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रवाद के मंत्र से किसी को नहीं रोका जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस घटना को नजरअंदाज कर ‘‘जिन्ना के जिन्न’’ को जगाने में जुटी है।

नकवी ने दावा किया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के नेताओं को खुश करने के लिए 1937 में राष्ट्रगीत के साथ जो किया था, उस पर प्रायश्चित करने के बजाय उसे सही ठहराने की कोशिश कर रही है।

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप


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