समन्वित सीवरेज संजाल से ऋषिकेश में सीवरेज प्रबंध में आया व्यापक सुधार
समन्वित सीवरेज संजाल से ऋषिकेश में सीवरेज प्रबंध में आया व्यापक सुधार
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बुधवार को कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत विकसित किए गए सीवरेज संजाल ने ऋषिकेश, तपोवन और मुनि की रेती की सीवरेज व्यवस्थाओं को एक ही ढांचे के अंतर्गत ला दिया है, जिससे क्षेत्र में अपशिष्ट जल प्रबंधन में व्यापक सुधार आया है।
एनएमसीजी ने इस बात पर जोर दिया कि यह बदलाव किसी एक परियोजना का परिणाम नहीं है, बल्कि क्षेत्र की अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के व्यापक पुनर्गठन का नतीजा है।
मिशन के अनुसार, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ऋषिकेश के नाले सीधे गंगा में गिरते थे, सीवेज उपचार की क्षमता सीमित थी तथा ऋषिकेश, तपोवन एवं मुनि की रेती की सीवरेज व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित होती थीं।
एनएमसीजी ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत तीनों निकटवर्ती शहरी क्षेत्रों को ‘समन्वित सीवरेज संजाल’ के अंतर्गत लाने का काम वर्ष 2017 में शुरू किया गया था।
मिशन ने बताया कि 375 करोड़ रुपये के निवेश से इस नेटवर्क के माध्यम से कुल 55 एमएलडी (दस लाख लीटर प्रतिदिन) सीवेज उपचार क्षमता स्थापित की गई है।
इस प्रणाली में स्वचालन और तृतीयक उपचार सुविधाओं से लैस आधुनिक सीवेज उपचार संयंत्र शामिल हैं। साथ ही, बिना उपचारित सीवेज को गंगा में जाने से रोकने के लिए नालों का रुख मोड़ दिया गया है।
मिशन ने बताया कि इन परियोजनाओं को वर्ष 2017 में मंजूरी दी गई थी।
सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण 2018 में शुरू हुआ, 2019 में तपोवन को इस संजाल से जोड़ा गया और 2022 में मुनि की रेती को इसमें शामिल किया गया।
एनएमसीजी ने कहा कि इस एकीकृत प्रणाली ने क्षेत्र में गंगा संरक्षण को मजबूत किया है, क्योंकि इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नदी में छोड़े जाने से पहले अपशिष्ट जल का उपचार हो। मिशन ने कहा कि इससे ऋषिकेश में गंगा के स्वच्छ हिस्सों के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है, जहां हिमालय से निकलने वाली यह नदी मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है।
एनएमसीजी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘इसका परिणाम गंगा में साफ दिखाई दे रहा है। जो पानी पहले बिना उपचार के आगे बह जाता था, अब वह उपचार के बाद ही नदी में पहुंचता है। जिस शहर से होकर हिमालय से उतरते हुए गंगा मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है, उसी शहर में इसकी स्वच्छता की नींव पहले ही रखी जा चुकी है।’
इसमें कहा गया, ‘शहर बदल गया है। गंगा बदल गई है।’
भाषा तान्या माधव
माधव

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