कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी : उमर अब्दुल्ला
कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी : उमर अब्दुल्ला
(तस्वीरों के साथ)
जम्मू, एक अप्रैल (भाषा) जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि जब तक कश्मीरी पंडित सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से घाटी में वापस नहीं लौट आते हैं, तबतक उनकी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
विधानसभा में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के विधायक अर्जुन सिंह राजू द्वारा पेश किए गए एक निजी विधेयक का विरोध करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार इस विषय पर कानून लाने के लिए तैयार है, बशर्ते समुदाय के भीतर आम सहमति हो।
राजू ने इस केंद्र शासित प्रदेश में कश्मीरी हिंदुओं के तीर्थस्थलों और धार्मिक स्थलों के बेहतर प्रबंधन, संरक्षण एवं प्रशासन की मांग करते हुए यह विधेयक पेश किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि कश्मीरी पंडितों को बेहद कठिन परिस्थितियों में घाटी छोड़कर जम्मू में अथवा जम्मू-कश्मीर के बाहर अन्य जगहों पर बसने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुरक्षा खतरे में पड़ने के बाद ही उन्हें पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब तक सुरक्षा की भावना पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती, तब तक उनकी वापसी की उम्मीद नहीं की जा सकती।”
उन्होंने कहा, “1990 से केंद्र और जम्मू-कश्मीर की सभी सरकारों ने कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन उनकी वापसी के लिए आवश्यक परिस्थितियां अभी तक नहीं बन पाई हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी वापसी तक कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों, विशेष रूप से उनके धार्मिक स्थलों और जमीनों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर दुष्प्रचारात्मक फिल्में बनाने से किसी को नहीं रोक सकती, क्योंकि इस तरह की कहानियां अधिक ध्यान आकर्षित करती हैं।
उन्होंने कहा कि लेकिन एक और पहलू है जिसे शायद ही कभी उजागर किया जाता है – कि कश्मीरी पंडितों की अनुपस्थिति में, कई क्षेत्रों में स्थानीय कश्मीरी मुसलमानों ने उनके मंदिरों की रक्षा और संरक्षण किया है।
भाषा
राजकुमार पवनेश
पवनेश

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