प. एशिया संघर्ष से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना अभी बहुत जल्दबाजी होगी: नौसेना प्रमुख

प. एशिया संघर्ष से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना अभी बहुत जल्दबाजी होगी: नौसेना प्रमुख

प. एशिया संघर्ष से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना अभी बहुत जल्दबाजी होगी: नौसेना प्रमुख
Modified Date: April 9, 2026 / 07:50 pm IST
Published Date: April 9, 2026 7:50 pm IST

(फोटो के साथ)

बेंगलुरु, नौ अप्रैल (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने पश्चिम एशिया युद्ध को आधुनिक युद्धकला में एक महत्वपूर्ण ‘केस स्टडी’ बताते हुए कहा कि इस संघर्ष से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना अभी बहुत जल्दबाजी होगी।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल पश्चिम एशिया संघर्ष में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि भविष्य के अभियानों के लिए उनसे सबक लिया जा सके।

वह यहां ‘रण संवाद’ मंच को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था ‘‘समुद्री बलों द्वारा बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) का विजुअलाइजेशन’’।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ‘‘अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। युद्ध अभी जारी है। हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं, देख रहे हैं कि क्या हो रहा है ।’’

नौसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि इस संघर्ष से मिलने वाले सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य संसाधनों की संवेदनशीलता बढ़ गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आज युद्धक्षेत्र की पारदर्शिता इतनी अधिक है कि दिखाई देने वाली कोई भी चीज, चाहे वह गतिशील हो या स्थिर, स्वाभाविक रूप से असुरक्षित है।’’

उन्होंने कहा कि हालांकि सभी प्लेटफॉर्म, चाहे जमीन पर हों, समुद्र में हों या अंतरिक्ष में हों, जोखिम के दायरे में हैं।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि विमानवाहक पोतों के समूह आज भी समुद्री ताकत का अहम हिस्सा हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि दुश्मन कितना शक्तिशाली है और दोनों पक्षों की ताकत में कितना संतुलन है।

उन्होंने कहा कि नौसेना अब नयी चुनौतियों के अनुसार अपनी रणनीति बदल रही है, ताकि वह एक साथ कई मोर्चों पर तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर सके। उन्होंने कहा कि आज के समय में नयी चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति और तकनीक का साथ-साथ विकसित होना जरूरी है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ‘‘आज युद्ध की कोई निश्चित प्रणाली नहीं है, कोई ठोस सिद्धांत नहीं है जिस पर हम आंख बंद करके भरोसा कर सकें।’’

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत के विस्तृत पड़ोस में जारी अस्थिरता, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री यातायात में बाधाएं, यह दर्शाती हैं कि आधुनिक सुरक्षा आपस में कितनी जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि आज का समुद्री युद्धक्षेत्र बहुत जटिल है-इसमें कई स्तर होते हैं, लेकिन सब एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और इसकी निगरानी भी पहले से ज्यादा संभव हो गई है।

स्वदेशी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना की युद्ध प्रबंधन प्रणाली बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए एक प्रमुख साधन के रूप में विकसित हुई है, जो त्वरित निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई के लिए विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त जानकारियों को एकीकृत करती है।

भाषा

देवेंद्र वैभव

वैभव


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