आंबेडकर की बदौलत ही जेएनयू की पहली महिला कुलपति बनना संभव हो पाया : शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित

आंबेडकर की बदौलत ही जेएनयू की पहली महिला कुलपति बनना संभव हो पाया : शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित

आंबेडकर की बदौलत ही जेएनयू की पहली महिला कुलपति बनना संभव हो पाया : शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित
Modified Date: April 9, 2026 / 10:20 pm IST
Published Date: April 9, 2026 10:20 pm IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा है कि संस्थान की पहली महिला कुलपति के रूप में उनका पद बी आर आंबेडकर के संघर्ष और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन की वजह से संभव हो पाया है।

पंडित विश्वविद्यालय में आठ से 14 अप्रैल तक आयोजित होने वाले ‘भीम सप्ताह’ के उद्घाटन सत्र में बुधवार को संबोधित कर रही थीं। यह सप्ताह आंबेडकर की विरासत और जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘बाबा साहब आधुनिक भारतीय सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में सबसे बुद्धिमान शख्स थे। वास्तव में, वह स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में सबसे शिक्षित मंत्री थे।’’

पंडित ने कहा कि विश्वविद्यालय में वंचित वर्गों के छात्रों का शैक्षणिक प्रदर्शन सामान्य वर्ग के छात्रों के बराबर है, और कुछ केंद्रों व विषयों में उन्होंने प्रवेश परीक्षाओं में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी किया है।

उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना मुख्य अतिथि के रूप में और द्रविड़ विश्वविद्यालय (कुप्पम, आंध्र प्रदेश) के कुलपति एल जी मल्लैया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

जेएनयू के सामाजिक विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर और डीन विवेक कुमार ने कार्यक्रम का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें व्याख्यान, शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुति और विश्वविद्यालय के बीए और एमए छात्रों के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता शामिल है।

भाषा आशीष माधव

माधव


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