जमीयत प्रमुख मदनी की टिप्पणी भारत की संप्रभुता के लिए खतरा : विहिप
जमीयत प्रमुख मदनी की टिप्पणी भारत की संप्रभुता के लिए खतरा : विहिप
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मुसलमानों को निशाना बनाए जाने और ऐसे कदमों को प्रशासनिक संरक्षण दिये जाने संबंधी जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) प्रमुख महमूद मदनी की टिप्पणियों को लेकर बृहस्पतिवार को उनपर निशाना साधा। विहिप ने यह भी आरोप लगाया कि मदनी की टिप्पणियां विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत के जरिये भारत की संप्रभुता के लिए “सीधे खतरे” के समान हैं।
यह प्रतिक्रिया जमीयत की कार्यसमिति की ओर से बुधवार को विभिन्न राज्यों में नागरिक एवं धार्मिक अधिकारों, भीड़ हत्याओं, बुलडोजर कार्रवाई और मस्जिदों तथा मदरसों को गिराए जाने के मामले में “प्रशासनिक स्तर पर कथित पक्षपातपूर्ण रवैये” को लेकर चिंता जताए जाने के बाद आई है।
मदनी ने कहा था कि “प्रशासनिक संरक्षण” के साथ एक खास समुदाय के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया था कि लोगों को अब ऐसा लगने लगा है कि न्यायिक व्यवस्था प्रभावी कानूनी सुरक्षा और त्वरित समाधान नहीं दे रही है।
मदनी ने कहा था कि दुनियाभर में भारत के कई दोस्त हैं और इन दोस्तों को साथ लेकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि देश “अपने रास्ते से न भटके।”
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दावा किया कि मदनी की अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने संबंधी टिप्पणी भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है।
बंसल ने कहा, “अगर किसी व्यक्ति या उसके कट्टरपंथी गुट का भारत के संविधान, सरकार, प्रशासन और यहां तक कि न्यायपालिका से भी भरोसा उठ गया है, तो वह अब भी यहां क्यों रह रहा है?”
उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से गिराई गई इमारतें कानून का उल्लंघन करके बनाई गई अवैध संरचनाएं थीं।
बंसल ने कहा कि इन संरचनाओं को मस्जिद, मदरसा और इबादत स्थल बताना, गलत काम और उसके लिए जिम्मेदार लोगों, दोनों का बचाव करने जैसा है।
उन्होंने कहा, “अब भारत बदल गया है। मौलानाओं की ऐसी भड़काऊ सोच भी बदलनी होगी।”
बंसल ने मदनी और अन्य मौलानाओं पर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे नारे सुनकर भड़कने का आरोप लगाया और कहा कि ये लोग भारतीय अदालतों में खुलेआम आतंकवादियों का पक्ष लेते हैं।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे “उकसाने वाले और राष्ट्र-विरोधी मौलवियों” से जल्द से जल्द दूरी बना लें।
साल 1919 में स्थापित जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दावा है कि वह भारतीय मुसलमानों का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावशाली संगठन है। इसके दो गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व महमूद मदनी करते हैं।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

Facebook


