झारखंड में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है : मंत्री

झारखंड में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है : मंत्री

झारखंड में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है : मंत्री
Modified Date: March 16, 2026 / 07:14 pm IST
Published Date: March 16, 2026 7:14 pm IST

रांची, 16 मार्च (भाषा) झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार की एलपीजी आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे घरों की रसोई के साथ-साथ होटल, कैंटीन और रेस्तरां जैसे व्यवसाय भी प्रभावित होने की संभावना है।

किशोर ने कहा कि एलपीजी आपूर्ति में कमी के चलते राज्य के खजाने को जीएसटी राजस्व का नुकसान हुआ।

एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति में समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

उन्होंने सदन को सूचित किया, ‘‘शहरी उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस सिलेंडर रिफिल बुकिंग की अवधि 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए इसे 45 दिन कर दिया गया है। सोलह मार्च तक, आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के पास लंबित रिफिल बुकिंग की संख्या 3.27 लाख है।’’

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पहले बुकिंग के 48 घंटों के भीतर सिलेंडर डिलीवरी की जाती थी, जिसे अब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए तीन से चार दिनों तक बढ़ा दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का झारखंड में एलपीजी की स्थिति पर पहले से ही नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, और आने वाले दिनों में ये प्रभाव और भी तीव्र होने की संभावना है।’’

मंत्री ने बताया कि 14 मार्च को राज्य के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा था कि झारखंड की वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की आवश्यकता 2,273.11 मीट्रिक टन प्रति माह है।

उन्होंने तेल कंपनियों के हवाले से बताया कि केंद्र के हालिया निर्देश के अनुसार, कुल वाणिज्यिक गैस आवश्यकता में 80 प्रतिशत की कटौती की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि झारखंड को अपनी कुल आवश्यकता 2,273.11 मीट्रिक टन के मुकाबले प्रति माह केवल 454.6 मीट्रिक टन वाणिज्यिक गैस की आपूर्ति प्राप्त होगी। इस तरह राज्य को 1,818.51 मीट्रिक टन की कमी रहेगी।’’

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश


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