झारखंड: आदिवासी संगठनों ने एक आदिवासी ग्राम प्रधान की हत्या को लेकर खूंटी बंद रखा

झारखंड: आदिवासी संगठनों ने एक आदिवासी ग्राम प्रधान की हत्या को लेकर खूंटी बंद रखा

झारखंड: आदिवासी संगठनों ने एक आदिवासी ग्राम प्रधान की हत्या को लेकर खूंटी बंद रखा
Modified Date: January 8, 2026 / 07:02 pm IST
Published Date: January 8, 2026 7:02 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

खूंटी, आठ जनवरी (भाषा) झारखंड के खूंटी जिले में विभिन्न आदिवासी संगठनों के समर्थकों ने आदिवासी ग्राम प्रधान सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में बृहस्पतिवार को छह घंटे का बंद रखा। पुलिस ने यह जानकारी दी।

कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को टायर जलाते और सड़कों को अवरुद्ध करते देखा गया, जबकि दुकानें और बाजार बंद रहे।

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पुलिस के अनुसार बुधवार शाम को खूंटी थानाक्षेत्र के नामकुम-जमुआदग रोड पर अज्ञात हमलावरों ने मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी। वह अपनी पत्नी के साथ मोटरसाइकिल पर घर लौट रहे थे।

मुंडा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में खूंटी सीट से अबूआ झारखंड पार्टी (एजेपी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वह ‘अदेल संगा पाधा राजा’ (22 गांवों के पारंपरिक मुखिया) थे।

प्रदर्शनकारियों ने मुंडा के शव को भगत सिंह चौक पर रखकर प्रदर्शन किया और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

मुंडा की पत्नी अमृता ने कहा, ‘‘मेरे पति ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। वह हमेशा गरीबों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ते रहे। उन्होंने सालों तक जल, जंगल और जमीन के लिए संघर्ष किया, लेकिन अपराधियों ने उन्हें गोलियों का निशाना बना दिया।’’

उन्होंने सरकार से हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की।

एजेपी के केंद्रीय अध्यक्ष रिनाल होरो ने हत्या की सीबीआई जांच की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने सिमडेगा-रांची मुख्य सड़क को सात घंटे तक अवरुद्ध रखा। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सका।

तोर्पा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) क्रिस्टोफर केरकेट्टा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने के बाद प्रमुख सड़कों को खाली करा लिया गया है।

बंद में भाग लेने वाले संगठनों में झारखंड उलगुलान मंच, आदिवासी समन्वय समिति, झारखंड पार्टी, अखिल भारतीय झारखंड पार्टी और अन्य शामिल हैं।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,‘‘हेमंत सरकार के कार्यकाल में आदिवासी समुदाय को लगातार निशाना बनाए जाने से राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। सरकार आम जनता, विशेषकर आदिवासी समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह से अक्षम साबित हो रही है।’’

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश


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