पत्रकार हत्या मामला: अदालत ने कहा- गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मामला साबित नहीं कर पाया अभियोजन पक्ष
पत्रकार हत्या मामला: अदालत ने कहा- गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मामला साबित नहीं कर पाया अभियोजन पक्ष
चंडीगढ़, नौ मार्च (भाषा) पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि अभियोजन पक्ष 2002 में एक पत्रकार की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ अपना मामला साबित नहीं कर सका और उसने सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाया।
अदालत ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के आरोप से राम रहीम सिंह को शनिवार को बरी कर दिया। सोमवार को जारी 113 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि ऐसे गवाह पर भरोसा नहीं किया जा सकता जो ‘‘बार बार अपना पाला बदल रहा है।’’
मुख्य न्यायाधीश शील नागू के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने 58 वर्षीय डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद बरी कर दिया।
हालांकि, पीठ ने इस मामले में तीन अन्य व्यक्तियों की दोषसिद्धि बरकरार रखी।
अदालत ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय में, अभियोजन पक्ष, ए1 (गुरमीत राम रहीम सिंह) के खिलाफ अपने मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, जबकि उसने ए2 से ए4 (तीन अन्य आरोपी) के मामले में ऐसा किया।’’
अदालत ने कहा, ‘कानून का यह एक स्थापित सिद्धांत है कि जहां अपराध करने और निर्दोष होने की दो संभावनाएं हों, वहां आरोपी को संदेह का लाभ पाने का अधिकार है।’
उच्च न्यायालय की पीठ ने सीबीआई द्वारा अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह खट्टा सिंह की गवाही से निपटने के तरीके पर भी चिंता जतायी।
उसने कहा, ‘‘इस अदालत की राय में, खट्टा सिंह जैसे गवाह पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता। उसने कई वर्षों तक चुप रहने का विकल्प चुना और फिर पाला बदलता रहा।’’
अदालत ने खट्टा सिंह के उस बयान को खारिज किया जिसमें उसने राम रहीम से धमकी मिलने की बात कही थी। अदालत ने कहा, ‘‘26.12.2006 को भी, जब उसने पहली बार बयान दिया, तब भी उसने ए1 को इस मामले में अभ्यारोपित नहीं किया और केवल रणजीत सिंह हत्याकांड के बारे में बात की। यदि उसे धमकी दी जा रही थी, तो यह समझ से परे है कि उसे केवल इसी मामले में धमकी क्यों दी जा रही थी, रणजीत सिंह मामले में नहीं, जिसमें उसने कहा था कि ए1 द्वारा साजिश रची गई थी।’’
अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सीबीआई ने खट्टा सिंह पर बयान देने के लिए दबाव डाला था, क्योंकि जांच एजेंसी पर जांच को जल्द से जल्द समाप्त करने का दबाव था।
मई 2024 में, एक अन्य मामले में, इसी उच्च न्यायालय ने राम रहीम और चार अन्य को 2002 में संप्रदाय के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में ‘‘अस्पष्ट जांच’’ का हवाला देते हुए बरी कर दिया था।
राम रहीम को इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने उस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
डेरा प्रमुख फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। वह अपनी दो शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में 2017 से 20 साल की सजा काट रहा है।
जनवरी 2019 में, राम रहीम और तीन अन्य को हरियाणा के सिरसा में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराया था। राम रहीम ने अपनी दोषसिद्धि को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
भाषा अमित नरेश
नरेश

Facebook


