पत्रकार संगठनों ने यूएनआई परिसर को सील करने के दौरान ‘दुर्व्यवहार’ और ‘बल प्रयोग’ की निंदा की

पत्रकार संगठनों ने यूएनआई परिसर को सील करने के दौरान 'दुर्व्यवहार' और 'बल प्रयोग' की निंदा की

पत्रकार संगठनों ने यूएनआई परिसर को सील करने के दौरान ‘दुर्व्यवहार’ और ‘बल प्रयोग’ की निंदा की
Modified Date: March 21, 2026 / 07:56 pm IST
Published Date: March 21, 2026 7:56 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) तीन प्रमुख पत्रकार संगठनों ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के परिसर को सील करने के दौरान कथित तौर पर ‘दुर्व्यवहार’ और ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ की शनिवार को निंदा की।

अलग-अलग बयानों में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई), एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) और इंडियन वीमेंस प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) ने कहा कि यूएनआई को भूमि आवंटन रद्द करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने में ‘‘अनुचित जल्दबाजी’’ दिखाई गई और शुक्रवार शाम को इस प्रक्रिया में पत्रकारों के साथ कथित तौर पर ‘‘दुर्व्यवहार’’ किया गया।

पीसीआई ने एक बयान के अनुसार, समाचार एजेंसी के कई पत्रकारों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मियों द्वारा उन्हें ‘बल प्रयोग’ करके उनके कार्यस्थल से जबरन हटा दिया गया, और उन्हें अपना निजी सामान भी लेने की अनुमति नहीं दी गई।

पीसीआई ने कहा, ‘‘भूमि विवाद से संबंधित अदालती आदेश के बाद कल शाम नयी दिल्ली के 9, रफी मार्ग स्थित यूएनआई परिसर में काम कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी पर पीसीआई गहरा दुख व्यक्त करता है।’’

पीसीआई ने “महिला कर्मियों समेत पत्रकारों पर की गई दमनात्मक कार्रवाई” की भी निंदा की।

ईजीआई ने कहा कि अदालत की वेबसाइट पर आदेश उपलब्ध होने से पहले ही, सैकड़ों पुलिस और अर्द्धसैन्य कर्मियों की एक टीम यूएनआई के परिसर में पहुंच गई थी और महिला कर्मचारियों सहित पत्रकारों को जबरन बाहर निकाल दिया गया, जबकि वे अपना काम कर रहे थे।

गिल्ड ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने की आवश्यकता पर सवाल नहीं उठाता है, लेकिन जो बात परेशान करने वाली थी वह थी उचित प्रक्रिया का अभाव और अदालत के निर्देशों को लागू करने में अधिकारियों द्वारा जोर-जबरदस्ती का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन।

आईडब्ल्यूपीसी ने कहा कि कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप हाल में उच्च न्यायालय का आदेश आया, लेकिन जो बात ‘‘बेहद चिंताजनक’’ है, वह यह कि पुलिस बल ने कार्यालय में मौजूद पत्रकारों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया।

आईडब्ल्यूपीसी ने कहा, ‘‘यूएनआई परिसर को खाली कराने की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जिस तरह से व्यवहार किया, वह वहां मौजूद लोगों के अनुसार, मनमाना, क्रूरतापूर्ण और अनुचित था। बताया जाता है कि महिला पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया।’’

आईडब्ल्यूपीसी ने कहा कि हालांकि मामले की कानूनी प्रक्रिया और उच्च न्यायालय का फैसला सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और उसके कारण कदम उठाए गए, फिर भी यह ‘चौंकाने वाला’ है कि राष्ट्रीय राजधानी के सबसे पुराने और सबसे सम्मानित मीडिया संस्थानों में से एक के समाचार कक्ष में ऐसे दृश्य देखने को मिले।

आईडब्ल्यूपीसी ने कहा, ‘‘ये घटनाएं संस्थान की गरिमा को कम करती हैं, प्रेस की स्वतंत्रता को खतरे में डालती हैं और इसे एक चूक के रूप में देखा जा सकता है, खासकर पेशे में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के संदर्भ में।’’

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुक्रवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डीओ) द्वारा यूएनआई परिसर को सील कर दिया गया। यूएनआई ने इस कार्रवाई को ‘‘अभूतपूर्व क्रूरता और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला’’ करार दिया।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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