न्यायमूर्ति शर्मा ने लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया था, न्याय नहीं मिलेगा: केजरीवाल

न्यायमूर्ति शर्मा ने लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया था, न्याय नहीं मिलेगा: केजरीवाल

न्यायमूर्ति शर्मा ने लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया था, न्याय नहीं मिलेगा: केजरीवाल
Modified Date: April 13, 2026 / 08:16 pm IST
Published Date: April 13, 2026 8:16 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से सोमवार को कहा कि आबकारी नीति मामले में उनके (न्यायमूर्ति शर्मा) पिछले फैसलों ने उन्हें (केजरीवाल) “लगभग दोषी और भ्रष्ट” घोषित कर दिया था।

केजरीवाल ने आशंका जताई कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा आबकारी नीति मामले में उन्हें (पूर्व मुख्यमंत्री को) आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई जारी रखती हैं तो उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।

न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से हटाए जाने के अनुरोध वाली अपनी याचिका पर दलीलें पेश करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई से अलग किए जाने संबंधी कानून के तहत सवाल न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा या ईमानदारी का नहीं है, बल्कि वादी के मन में “उनके पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने की उचित आशंका” का है।

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक ने दावा किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से जुड़े एक अन्य मामले को छोड़कर, न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष किसी अन्य मामले की सुनवाई इतनी तेज “गति” से नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि इन मामलों की सुनवाई में अदालत द्वारा जांच एजेंसियों के तर्कों का समर्थन करने की एक प्रवृत्ति (रुझान) रही है।

केजरीवाल ने कहा कि नौ मार्च को कार्यवाही के पहले दिन अदालत ने तीन महीने से अधिक समय तक दैनिक आधार पर की गई सुनवाई के बाद निचली अदालत की ओर से पारित आरोपमुक्त किए जाने संबंधी फैसले को जल्दबाजी में “तीव्र, एकतरफा आदेश” पारित करके “निष्क्रिय” कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

निचली अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता और पूरी तरह से बेबुनियाद साबित हुआ है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने नौ मार्च को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल सहित सभी 23 लोगों को नोटिस जारी किए। उन्होंने कहा कि आरोप तय करने के चरण में निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष प्रथम दृष्टया गलत प्रतीत होते हैं और उनपर विचार किए जाने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने आबकारी नीति मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने से जुड़ी निचली अदालत की सिफारिश के अमल पर भी रोक लगा दी थी।

केजरीवाल ने कहा, “मैं स्तब्ध था और मुझे इस बात की आशंका है कि कहीं अदालत पक्षपातपूर्ण रवैया तो नहीं अपना रही है और क्या मुझे न्याय मिलेगा। इसकी इतनी जल्दी क्या थी? इसकी जरूरत क्यों थी?”

‘आप’ प्रमुख ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े मामले की कार्यवाही स्थगित करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा, “यह सीबीआई की याचिका थी। ईडी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ईडी इसमें पक्षकार भी नहीं है। कोई लिखित अर्जी नहीं थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केवल मौखिक अनुरोध किया था।”

केजरीवाल ने कहा कि इससे पहले न्यायमूर्ति शर्मा ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर भी उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा ने मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था।

केजरीवाल ने कहा, “मुझे लगभग दोषी करार दिया गया था। मुझे लगभग भ्रष्ट करार दिया गया था। केवल सजा सुनानी बाकी रह गई थी।”

उन्होंने कहा, “अदालत ने (मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर अपने फैसले में) एक तरह से कह दिया था कि ये सभी लोग भ्रष्ट हैं। ये “महाभ्रष्ट” हैं। केवल तीन सुनवाई के बाद यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि मनीष बहुत भ्रष्ट व्यक्ति हैं।”

केजरीवाल ने कहा कि आरोपमुक्त किए जाने संबंधी आदेश में निचली अदालत ने ऐसे निष्कर्ष दिए हैं, जो कई अहम मुद्दों पर उच्च न्यायालय की ओर से पहले जारी आदेशों के “बिल्कुल विपरीत” हैं, जिनमें गवाहों के बयानों की स्वीकार्यता भी शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या न्यायमूर्ति शर्मा अपना दृष्टिकोण बदल पाएंगी।

‘आप’ संयोजक ने न्यायमूर्ति शर्मा के अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की ओर से आयोजित चार कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पर भी आपत्ति जताई।

केजरीवाल ने दलील दी कि न्यायमूर्ति शर्मा भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा की तरफ “झुकाव” रखती हैं तथा इन संगठनों का वैचारिक विरोधी होने के नाते उन्हें न्याय न मिलने की आशंका है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने जब केजरीवाल से पूछा कि क्या इन कार्यक्रमों में उन्होंने वैचारिक या राजनीतिक झुकाव दर्शाने वाली कोई टिप्पणी की थी, तो ‘आप’ प्रमुख ने कहा कि न्यायाधीश की मौजूदगी ही काफी थी।

केजरीवाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम में कहा है कि ‘आप’ प्रमुख को उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख करना होगा।

इसपर न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “वह (शाह) जो बोलते हैं, उस पर मेरा क्या नियंत्रण है।”

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति शर्मा का इस मामले में हितों का टकराव है। उन्होंने न्यायमूर्ति शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग किए जाने के अनुरोध वाली याचिका पर अपनी दलीलें पूरी कीं।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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