Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy: ‘हर कोई सनातनी है’, सारा अली खान पूजा विवाद पर कंगना रनौत का बयान, कहा – सच लिखने में डर क्यों?
Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy: ‘हर कोई सनातनी है’, सारा अली खान पूजा विवाद पर कंगना रनौत का बयान, कहा - सच लिखने में डर क्यों?
Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy/Image Source: ANI
- सारा अली खान पूजा विवाद
- कंगना रनौत का बड़ा बयान
- मचा सियासी बवाल
Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy: कंगना रनौत के एक बयान ने इन दिनों धार्मिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। मामला बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और पूजा-अर्चना को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।
कंगना रनौत का बड़ा बयान (Kedarnath temple entry rules)
Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy: दरअसल खबरें सामने आई थीं कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष की ओर से अभिनेत्री सारा अली खान से मंदिर में पूजा करने के लिए हलफनामा (एफिडेविट) जमा करने को कहा गया था। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर आम जनमानस तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई। इसी बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हर कोई सनातनी है… जो भी यहाँ है, वह सनातनी है… वे भी सनातनी हैं, तो फिर सच लिखने में डर क्यों?” उनके इस बयान ने बहस को नया मोड़ दे दिया है।
#WATCH | ” Sab sanatani hain…Yahan jo bhi hain sanatani hain…Wo bhi sanatani hai, so why fear in writing down the truth,” says BJP MP Kangana Ranaut, on reports of Badrinath, Kedarnath Temple Committee Chairman asking actor Sara Ali Khan to submit an affidavit to offer… pic.twitter.com/Zz5V4bsnai
— ANI (@ANI) March 18, 2026
हर कोई सनातनी है- कंगना (Sara Ali Khan affidavit news)
Kangana Ranaut on Sara Ali Khan Controversy: कंगना ने अपने बयान में यह भी कहा कि “सनातन ही सत्य है” और इस संदर्भ में किसी प्रकार की झिझक या भय नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान उन खबरों के संदर्भ में आया है, जिनमें मंदिरों में पूजा के नियमों और गैर-हिंदू व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों के नियम, आस्था और व्यक्तिगत पहचान जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर कुछ लोग मंदिर प्रशासन के फैसले को परंपराओं के अनुरूप बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।

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