कर्नाटक : लाडले मशक मामले के दंगाइयों के खिलाफ मुकदमे वापसी पर कांग्रेस और भाजपा में वाकयुद्ध

कर्नाटक : लाडले मशक मामले के दंगाइयों के खिलाफ मुकदमे वापसी पर कांग्रेस और भाजपा में वाकयुद्ध

कर्नाटक : लाडले मशक मामले के दंगाइयों के खिलाफ मुकदमे वापसी पर कांग्रेस और भाजपा में वाकयुद्ध
Modified Date: May 22, 2026 / 06:43 pm IST
Published Date: May 22, 2026 6:43 pm IST

बेंगलुरु, 22 मई (भाषा) कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा ने शुक्रवार को लाडले मशक दरगाह दंगा मामले में कथित तौर पर शामिल मुसलमानों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के मंत्रिमंडल के फैसले को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।

कांग्रेस ने कहा है कि यह मामला ‘‘राजनीतिक कारणों से दर्ज’’ किया गया था, जबकि भाजपा ने सरकार पर ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति’’ करने का आरोप लगाया है।

राज्य मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले मशक दरगाह में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामलों को वापस लेने का फैसला किया। इसकी भाजपा नेताओं ने कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि यह कदम कानून और व्यवस्था की कीमत पर अल्पसंख्यक समूहों का तुष्टीकरण करने के समान है।

यह मामला एक मार्च, 2022 का है, जब कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने दरगाह के अंदर शिवलिंग के शुद्धिकरण का अनुष्ठान करने की मांग की थी। इस मुद्दे के कारण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसके परिणामस्वरूप इलाके में निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी।

सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा, ‘‘यह कोई बड़ी बात नहीं है। ये मामले उनके (मुसलमानों के) खिलाफ राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए थे। हमने किसानों के खिलाफ मामले वापस ले लिए हैं। हमने कन्नड़ कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले वापस ले लिए हैं। हमने विरोध प्रदर्शन करने वाले सभी लोगों के खिलाफ मामले वापस ले लिए हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’’

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मामलों को वापस लेना विभिन्न समूहों से जुड़े आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों के संबंध में पहले लिए गए निर्णयों के अनुरूप था।

शिवकुमार ने इस आरोप का खंडन किया कि यह कदम किसी विशेष समुदाय को खुश करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विभिन्न संगठनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के कैबिनेट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह कदम कैबिनेट की एक उप-समिति की सिफारिशों पर आधारित था, जिसने प्रत्येक मामले की विस्तार से समीक्षा की थी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार ने तुष्टीकरण की सारी हदें पार कर दी हैं।

विजयेंद्र ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राज्य में अब कांग्रेस सरकार द्वारा वोट बैंक की राजनीति और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का निर्लज्ज प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। न्यूनतम जिम्मेदारी का भी पालन न करते हुए, नैतिकता, गरिमा और शालीनता को ताक पर रखकर यह तुगलक शैली की कांग्रेस सरकार सभ्यता की हर सीमा को पार कर चुकी है।’’

भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री वी सुनील कुमार ने भी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि लाडले मशक मामले में मुकदमों को वापस लेने की तुलना किसानों या कन्नड़ कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामलों को वापस लेने से नहीं की जा सकती।

भाषा

शफीक पवनेश

पवनेश


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