तमिलनाडु को कावेरी के पानी के मुद्दे पर कर्नाटक सरकार आगे की कार्रवाई पर चर्चा करेगीःरेड्डी
तमिलनाडु को कावेरी के पानी के मुद्दे पर कर्नाटक सरकार आगे की कार्रवाई पर चर्चा करेगीःरेड्डी
बेंगलुरु, 12 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बुधवार को कहा कि राज्य के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देश के अनुसार तमिलनाडु को प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा कर रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे सकती है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य के साथ कोई अन्याय न हो।
कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने मंगलवार को नयी दिल्ली में हुई बैठक में कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि वह 12 अगस्त से 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़े।
इसके बाद सीडब्ल्यूएमए ने इस फैसले को बरकरार रखा।
रेड्डी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और मैंने इस आदेश को लेकर विस्तृत चर्चा की है। हमने दिल्ली में अपने वकीलों और राज्य के सिंचाई विशेषज्ञों से भी बातचीत की है। पहले हमें 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा गया था, जो ठीक था, लेकिन अब हमें 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है। यह कुल मिलाकर 16 टीएमसी पानी होता है, जो हमारे लिए बहुत भारी पड़ेगा। यह उचित नहीं है।’’
राज्य के जल संसाधन मंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा कि अगर राज्य में उपलब्ध पानी को ध्यान में रखते हुए कम मात्रा में पानी छोड़ने को कहा गया होता, तो कर्नाटक को पानी छोड़ने में कोई कठिनाई नहीं होती।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मात्रा बहुत अधिक है।’’
कर्नाटक के पुराने मैसूरु क्षेत्र में मानसून संतोषजनक नहीं रहने की बात कहते हुए मंत्री ने दावा किया कि तमिलनाडु के जलाशयों में पर्याप्त पानी मौजूद है।
उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में अक्टूबर से दिसंबर के बीच होने वाले पूर्वोत्तर मानसून के दौरान ज्यादातर बारिश होती है और वहां कर्नाटक की तुलना में जल स्तर भी बेहतर है।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां हमारा जल स्तर बहुत नीचे है। हम 800–1,000 फुट तक गहराई में भी जाएं, तो पानी नहीं मिलता, जबकि उन्हें इससे काफी कम गहराई पर ही पानी मिल जाता है। इन सभी तथ्यों के साथ हमारे अतिरिक्त मुख्य सचिव, वकीलों और विशेषज्ञों ने प्रभावी ढंग से हमारा पक्ष रखने के बावजूद यह आदेश जारी किया गया है। पंद्रह दिनों में 16 टीएमसी पानी छोड़ना हमारे लिए मुश्किल होगा। हमने इस पर चर्चा की है। अब हम तय करेंगे कि क्या करना है।’’
जब रेड्डी से पूछा गया कि क्या राज्य इस आदेश को चुनौती देगा, तो उन्होंने कहा कि इस मामले पर चर्चा की जाएगी और उसके बाद फैसला लिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि हमें उच्चतम न्यायालय जाना ही पड़ेगा, और कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने दिल्ली में वकीलों और विशेषज्ञों से बात की है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य के साथ कोई अन्याय न हो।’’
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश

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