कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धर्मस्थल मामले की जांच पर लगी अंतरिम रोक हटाई

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धर्मस्थल मामले की जांच पर लगी अंतरिम रोक हटाई

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धर्मस्थल मामले की जांच पर लगी अंतरिम रोक हटाई
Modified Date: November 12, 2025 / 10:18 pm IST
Published Date: November 12, 2025 10:18 pm IST

बेंगलुरु, 12 नवंबर (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल कस्बे में ‘‘कई हत्याओं, बलात्कारों और शव दफनाने’’ के आरोपों के संबंध में स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जांच पर अपनी अंतरिम रोक बुधवार को हटा ली।

सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश मत्तनवार, महेश शेट्टी थिमारोडी, टी जयंत और विट्ठल गौड़ा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद 30 अक्टूबर को अंतरिम रोक लगाई गई थी। चारों ने मामले की प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था, हालांकि, पहले इन सभी लोगों ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने का समर्थन किया था।

न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज ने रोक हटाते हुए मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कोई उत्पीड़न न हो।

एसआईटी ने पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएनएस) की धारा 35(3) के तहत कार्यकर्ता महेश शेट्टी, मत्तनवार, विट्ठल गौड़ा और जयंत को नोटिस जारी किए थे।

मत्तनवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस. बालन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने जांच जारी रखने का विरोध नहीं किया, बल्कि इसमें शामिल सभी कार्यकर्ताओं के लिए गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की है।

एसआईटी ने मामले को रद्द करने की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि (प्रारंभिक) जांच में महत्वपूर्ण सबूत सामने आए हैं जिनके मद्देनजर आगे की जांच जरूरी है।

राज्य ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं को तत्काल गिरफ्तारी का कोई खतरा नहीं है। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘यदि याचिकाकर्ता बीएनएनएस की धारा 35(3) के तहत आवश्यक जांच में सहयोग करते हैं, तो गिरफ्तारी का कोई सवाल ही नहीं उठता।’’

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश


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