कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया, नेकां, पीडीपी ने प्रशासन की आलोचना की

कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया, नेकां, पीडीपी ने प्रशासन की आलोचना की

: , May 13, 2022 / 08:49 PM IST

श्रीनगर, 13 मई (भाषा) जम्मू कश्मीर के बडगाम में सरकारी नौकरी करने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के शख्स की हत्या के बाद घाटी के विभिन्न हिस्सों में शुक्रवार को तनाव व्याप्त रहा। समुदाय के लोगों ने उन्हें कश्मीर के बाहर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की मांग की।

अल्पसंख्यक समुदाय के राहुल भट की लश्कर ए तैयबा के आतंकवादियों ने बृहस्पतिवार को हत्या कर दी थी।

मध्य कश्मीर के बडगाम में स्थित शेखपोरा शिविर इन प्रदर्शनों का केंद्र रहा जहां कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को अस्थायी आवासों में बसाया गया है। लोग केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हवाई अड्डे की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोक दिया।

अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों से वहां से जाने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और आगे बढ़ने की जिद की, जिसके बाद संघर्ष हुआ और सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया व आंसू गैस के गोले छोड़े।

किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है, लेकिन पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित रूप से जख्मी हुए लोगों की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई हैं।

प्रदर्शनकारियों ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा आएं और उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दें। हालांकि, उपराज्यपाल उस समय एक समारोह में शिरकत के लिए सोपोर में थे।

सिन्हा के दफ्तर ने ट्वीट किया कि उन्होंने राहुल भट के परिजनों से मुलाकात की है और उन्हें इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया।

उन्होंने ट्वीट किया, “राहुल भट के परिजनों से मुलाकात की और परिवार को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया। दुख की इस घड़ी में सरकार राहुल भट के परिवार के साथ खड़ी है।”

सिन्हा ने कहा कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को इस जघन्य कृत्य के लिए बहुत भारी कीमत चुकानी होगी।

शेखपोरा के अलावा वेसु, काजीगुंड और मट्टन में भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की धमकी दी। उनका आरोप है कि सरकार समुदाय के उन सदस्यों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में नाकाम रही है जिन्हें विस्थापितों के लिए प्रधानमंत्री पैकेज के तहत रोजगार प्रदान किया गया था।

उल्लेखनीय है कि आतंकवादियों ने चडूरा शहर में तहसील कार्यालय के भीतर घुस कर राहुल भट को बृहस्पतिवार को गोली मारी थी।

इस बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया गया, ताकि वह प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडितों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बडगाम नहीं जा पाएं।

बहरहाल, पुलिस ने मुफ्ती के इस दावे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने ट्विटर पर आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि कश्मीरी मुसलमान और पंडित एक-दूसरे के दर्द को साझा करें, क्योंकि यह उनके दुर्भावनापूर्ण सांप्रदायिक विमर्श में फिट नहीं बैठता है।

एक वीडियो संदेश में, मुफ्ती ने घाटी में बहुसंख्यक समुदाय से अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होने का आग्रह किया।

मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और हिंदुओं तथा मुसलमानों को एक-दूसरे का सबसे बड़ा शत्रु दिखाने के लिए हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ करने का खेल खेल रही है, जम्मू कश्मीर इकलौता प्रदेश है जहां हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और बौद्ध एक साथ मिलकर रह रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए यह जम्मू कश्मीर के सभी लोगों का फर्ज है कि वह उन लोगों के साथ खड़े हों, जो हमारे बीच रहते हैं चाहे वह कश्मीरी पंडित हों या सिख भाई। जिस तरह हमने 1947 में उनकी जिदंगी और संपत्ति की रक्षा की थी, जब गांधी जी को भी उस समय कश्मीर से उम्मीद की किरण दिखी थी।’’

मुफ्ती ने कहा, “ हमें अपने अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होना है और इसलिए मैं आप सब से अपील करती हूं कि जुमे (शुक्रवार की) नमाज़ के मौके पर सभी मस्जिदों से हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मज़बूत वकालत करें।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें पूरे देश को जम्मू-कश्मीर के भाईचारे और उसके इतिहास का संदेश देने की जरूरत है कि हम एक धर्मनिरपेक्ष राज्य हैं और एकजुटता से रहने वाले लोग हैं ताकि सरकार को मुसलमानों को बदनाम करने का मौका न मिले।”

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह ‘‘शर्मनाक है कि वैध और उचित विरोध’’ के खिलाफ ‘‘कड़ी कार्रवाई’’ की गई।

उन्होंने ट्विटर पर कहा, ‘‘यह कश्मीर के लोगों के लिए नयी बात नहीं है क्योंकि जब प्रशासन के पास हथौड़ा है तो हर समस्या कील लगती है। अगर उपराज्यपाल की सरकार कश्मीरी पंडितों की रक्षा नहीं कर सकती तो उन्हें प्रदर्शन करने का अधिकार है।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि सैलानियों की संख्या में इजाफा होना सामान्य स्थिति का होना नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों का संकेतक है।

उन्होंने कहा कि सामान्य हालात का मतलब है कि डर और आतंक न हो, आतंकवादी अपनी मन-मर्जी से हमले न कर पाएं तथा लोकतांत्रिक शासन हो। अब्दुल्ला के मुताबिक, “ आप किसी भी मानदंड का इस्तेमाल कर लें मगर पाएंगे कि कश्मीर आज सामान्य स्थिति से दूर है।’’

उन्होंने पुलवामा में शुक्रवार को की गई एक पुलिसकर्मी की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि घाटी में लक्षित हत्याएं “बेरोकटोक” जारी हैं।

उन्होंने कहा, “ कल राहुल को उनके दफ्तर में (गोली मारी गई) और आज जम्मू कश्मीर पुलिस में एसपीओ रियाज़ अहमद थोकर को उनके घर में मार दिया गया। लक्षित करके हत्याएं किए जाना बेरोकटोक जारी है। इस हत्या की निंदा करने के लिए मेरे पास श्ब्द नहीं हैं। अल्लाह रियाज़ को जन्नत में जगह दें।”

कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों के विरोध के बीच शुक्रवार को जम्मू में भट का अंतिम संस्कार किया गया।

मुठी, हजूरीबाग और बुंतलाब में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी और टायर जलाए।

भट के पार्थिव शरीर को जम्मू के दुर्गा नगर इलाके में स्थित उनके आवास पर शुक्रवार की सुबह लाया गया, जहां सैकड़ों लोग दुखी थे और उनके परिजन फूट-फूट कर रो रहे थे।

बडगाम की शेखपोरा प्रवासी कॉलोनी में भट के साथ रह रहीं उनकी पत्नी और बेटी भी उनके शव के साथ कश्मीर से यहां पहुंची।

उनके भाई सनी ने बुंतलाब श्मशान घाट पर राहुल भट की चिता को मुखाग्नि दी और इस दौरान लोगों ने ‘‘राहुल भट अमर रहे’’ के नारे लगाए।

राहुल भट के परिवार सहित कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर समुदाय के पुनर्वास के नाम पर युवा कश्मीरी हिंदुओं को ‘‘बलि का बकरा’’ बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने घाटी में स्थायी रूप से फिर से बसने के उनके सपने को चकनाचूर कर दिया है।

राहुल भट के रिश्तेदार सून नाथ भट ने कहा, ‘‘आपने (भाजपा) युवा कश्मीरी पंडितों को नौकरियां देने और उनके पुनर्वास के नाम पर उनकी हत्या करने की योजना बनाई।’’ उन्होंने कहा कि वे आतंकवादियों के लिए ऐसे लोग हैं, जिन्हें मार कर आतंकवादी ‘‘निशाना लगाने का अभ्यास’’ करते हैं।

अंतिम संस्कार में जम्मू-कश्मीर की भाजपा इकाई के अध्यक्ष रविंद्र रैना और अन्य पार्टी नेता भी शामिल हुए, लेकिन उन्हें कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। कश्मीरी पंडितों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की।

भाषा नोमान नरेश

नरेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)