केरल विधानसभा : मछुआरों की बदहाली को लेकर एलडीएफ व यूडीएफ का एक दूसरे पर वार-पलटवार

केरल विधानसभा : मछुआरों की बदहाली को लेकर एलडीएफ व यूडीएफ का एक दूसरे पर वार-पलटवार

केरल विधानसभा : मछुआरों की बदहाली को लेकर एलडीएफ व यूडीएफ का एक दूसरे पर वार-पलटवार
Modified Date: June 30, 2026 / 03:12 pm IST
Published Date: June 30, 2026 3:12 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 30 जून (भाषा) मछुआरों की समस्याओं खासकर केरल में ‘ट्रॉलिंग’ (जाल फेंककर मछली पकड़ना) पर लगी रोक के मद्देनजर राज्य विधानसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिला।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने आरोप लगाया कि ‘बचत-सह-राहत योजना’ के तहत मछुआरों को समय पर पैसे नहीं दिए जा रहे हैं और पिछली वाम सरकार द्वारा उनके लिए शुरू की गई कई कल्याणकारी योजनाओं को मौजूदा सरकार आगे नहीं बढ़ा रही है।

माकपा नेता साजी चेरियन ने कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि 10 जून से 31 जुलाई तक ‘ट्रॉलिंग’ पर लगी 52 दिन की रोक के दौरान मछुआरों को अपनी आजीविका चलाने में संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से उनकी मुश्किलों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी कहा कि वामपंथी सरकार ने ‘बचत-सह-राहत योजना’ के तहत मिलने वाले लाभ को बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दिया था, लेकिन मौजूदा सरकार अब भी पुरानी राशि यानी 4,500 रुपये ही दे रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस योजना के तहत मछुआरों ने जो योगदान दिया था, सिर्फ वही रकम उन्हें दी गई है, और राज्य व केंद्र सरकार का बराबर का हिस्सा अभी तक नहीं बांटा गया है।

इन दावों को खारिज करते हुए मत्स्य पालन मंत्री वी.ई. अब्दुल गफूर ने कहा कि इस योजना के तहत 1,500 रुपये की पहली किस्त (जो मछुआरों का योगदान था) तीन जिलों में बांट दी गई है।

मंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र का योगदान आमतौर पर जुलाई और अगस्त के महीनों में दिया जाता है और उसी के अनुसार इसका भुगतान किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि मछुआरा परिवारों को मुफ्त राशन देने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं और सरकार उनके लिए हर संभव कोशिश कर रही है। मंत्री ने कहा कि सत्ता में आते ही सरकार ने केरोसिन पर सब्सिडी बढ़ाकर 75 रुपये कर दी थी।

मंत्री का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि बजट में नियोजित खर्च में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की कटौती के बावजूद, सरकार ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और मछुआरा समुदायों के लिए अतिरिक्त निधि का प्रावधान किया ताकि उन पर कोई असर न पड़े।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश


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