केरल बजट का लक्ष्य पूर्ण निजीकरण, राज्य की संपत्तियों को कॉरपोरेट घरों को सौंपने की कोशिश : माकपा
केरल बजट का लक्ष्य पूर्ण निजीकरण, राज्य की संपत्तियों को कॉरपोरेट घरों को सौंपने की कोशिश : माकपा
तिरुवनंतपुरम, 20 जून (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की केरल इकाई के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य की संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार द्वारा पेश किया गया पहला बजट बड़े पैमाने पर निजीकरण का खाका है और यह सार्वजनिक संपत्ति एवं प्राकृतिक संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की एक कोशिश है।
गोविंदन ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि खुद को नेहरूवादी समाजवादी बता रहे मुख्यमंत्री वी डी सतीशन बजट का इस्तेमाल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद करने और उनकी संपत्ति निजी निकायों को सौंपने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बजट भाषण राज्य में बड़े पैमाने पर निजीकरण की शुरुआत था।
गोविंदन ने आरोप लगाया, ‘‘सतीशन खुद को नेहरूवादी समाजवादी बताते हैं, लेकिन बजट में ऐसी नीतियां दिखती हैं जो नेहरू के आदर्शों के बिल्कुल उलट हैं। सरकार निजीकरण के जरिए संसाधन जुटाने की कोशिश कर रही है।’’
माकपा नेता ने दावा किया कि सरकार का निजी पूंजी पर ज़ोर ‘‘केरल को बेचने’’ और राज्य की खनिज संपदा एवं जमीन संसाधनों को कॉरपोरेट हितों के हवाले करने के एक बड़े एजेंडे को दिखाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित ‘विजन समुद्र’ परियोजना ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के खनन में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिशों का हिस्सा है, यह एक ऐसा क्षेत्र है जो अब तक सरकारी नियंत्रण में रहा है।
गोविंदन ने ‘लैंड बैंक’ बनाने के प्रस्ताव की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि इसका मकसद कॉरपोरेट ग्रुप को जमीन उपलब्ध कराना था।
उन्होंने कहा कि केरल में जमीन सुधारों का लंबा इतिहास रहा है, जिनसे किसानों, भूमिहीन लोगों और अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों को फ़ायदा हुआ है।
उन्होंने सरकार पर उन सिद्धांतों से दूर जाने का आरोप लगाया।
भाषा राजकुमार रंजन
रंजन

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