केरल सरकार को शराब पर कर में कटौती, दुर्लभ खनिजों से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए: वेणुगोपाल

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केरल सरकार को शराब पर कर में कटौती, दुर्लभ खनिजों से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए: वेणुगोपाल

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 03:59 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 03:59 PM IST

अलप्पुझा (केरल), 22 जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कम करने के अपने फैसले और तटीय इलाकों में दुर्लभ खनिजों से जुड़े प्रस्तावों के संबंध में जताई गई चिंताओं का समाधान करे।

अलप्पुझा से कांग्रेस सांसद ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने हाल ही में कार्यभार संभाला है और उसे काम करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी को सरकार के फैसलों को लेकर कोई शिकायत है, तो उस पर पार्टी के भीतर चर्चा की जाएगी।’’

वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘सरकार के सत्ता में आए अभी सिर्फ एक महीना ही हुआ है। उसका काम ठीक से चल रहा है। ज़ाहिर है कि कुछ वर्गों की चिंताएं होंगी क्योंकि यह एक नयी सरकार है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कम करने और दुर्लभ खनिजों से जुड़े प्रस्तावों को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य के बजट में कई सकारात्मक और लंबे समय से प्रतीक्षित घोषणाएं शामिल हैं।

राज्य के बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में कटौती की घोषणा की गई। इस प्रस्ताव की कांग्रेस पार्टी के भीतर ही आलोचना हुई, क्योंकि वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसे रद्द करने का अनुरोध किया।

आर्कबिशप जोसेफ पम्पलानी ने इस कदम की खुलकर आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को राज्य में शराब की खपत कम करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि नशीले पेय पदार्थों को अधिक सुलभ बनाने पर।

बजट पेश होने के तुरंत बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी आरोप लगाया कि यह कदम भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। हालांकि, सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया।

वेणुगोपाल ने प्रस्तावित ‘रेयर अर्थ’ और महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे तटीय क्षेत्रों, विशेषकर अलप्पुझा, पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर कांग्रेस और यूडीएफ की स्पष्ट नीति है।

उन्होंने कहा कि तटीय इलाकों पर असर डालने वाले किसी भी मामले पर मत्स्य क्षेत्र के हितधारकों के साथ चर्चा की जानी चाहिए।

भाषा आशीष रंजन

रंजन