कोझिकोड (केरल), 14 जून (भाषा) केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार को कहा कि राज्य में निपाह का कोई नया मामला सामने नहीं आया है और उन्होंने इस बीमारी के फैलने पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का बचाव किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
निपाह की स्थिति पर समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि निपाह के एकमात्र मरीज को रिबाविरिन, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट और रेमडेसिविर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की पहली डोज 12 जून को दी गई थी। चूंकि भारत में कहीं भी रेमडेसिविर उपलब्ध नहीं थी, इसलिए हमारे अधिकारियों ने इसे बहरीन से मंगाने की पहल की। दवा दिल्ली पहुंची और वहां से उसे कन्नूर भेजा गया। आज सुबह-सुबह मरीज को पहली डोज दी गई।’
मुरलीधरन ने कहा कि अब तक निपाह का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि उसके संपर्क में आए लोगों में मौजूद लक्षणों वाले ग्यारह लोगों की जांच की गई और सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई।
मंत्री के अनुसार, अभी संपर्क सूची में 100 लोग हैं, इनमें से चार सर्वाधिक जोखिम वाली श्रेणी में, 14 अधिक जोखिम वाली और 82 कम जोखिम वाली श्रेणी में हैं। इनमें से 44 स्वास्थ्यकर्मी हैं।
अब तक कुल 30 टेस्ट किए गए हैं, जिनमें से 29 में बीमारी की पुष्टि नहीं हुई और सिर्फ ‘इंडेक्स पेशेंट’ में ही यह पाया गया।
‘इंडेक्स पेशेंट’ उस पहले पहचाने गए मरीज को कहते हैं जिसके माध्यम से किसी बीमारी या संक्रमण की शुरुआत का पता चलता है।
मंत्री ने कहा कि रमनट्टुकारा नगरपालिका के वार्ड संख्या पांच में 370 घरों और 1,047 लोगों के बीच किए गए सर्वे में निपाह के लक्षण वाला कोई व्यक्ति नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्व-शासन संस्थाएं निगरानी में रखे गए लोगों तक भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचा रही हैं।
मरीज को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था और चिकित्सक उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे।
मंत्री ने शिगेला संक्रमण पर भी अद्यतन जानकारी देते हुए कहा कि एक जनवरी से केरल में 135 मामलों की पुष्टि हुई है।
इस संक्रमण से जुड़ी तीन मौतें हुई हैं और ये सभी कोझिकोड जिले में हुई हैं; मरने वालों में तीन और चार साल के दो बच्चे भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अभी चार बच्चों का इलाज गहन चिकित्सा इकाइयों में चल रहा है और उनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
मुरलीधरन ने इस आलोचना को खारिज कर दिया कि सरकार निपाह के इलाज के लिए दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा, ‘मरीज को अस्पताल में भर्ती होने वाले दिन ही रिबाविरिन देना शुरू कर दिया गया था। शुरुआत में हमें बताया गया था कि चेन्नई में रेमडेसिविर उपलब्ध है, लेकिन बाद में पता चला कि वहां भी इसका भंडार खत्म हो चुका था।’
उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चला है कि 2021 के बाद से भारत में यह दवा नहीं खरीदी गई है, हालांकि इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
भाषा शुभम सुरेश
सुरेश