केरल उच्च न्यायालय ने लिट्टे के संदिग्ध कार्यकर्ता को जमानत दी

केरल उच्च न्यायालय ने लिट्टे के संदिग्ध कार्यकर्ता को जमानत दी

केरल उच्च न्यायालय ने लिट्टे के संदिग्ध कार्यकर्ता को जमानत दी
Modified Date: February 26, 2026 / 12:05 pm IST
Published Date: February 26, 2026 12:05 pm IST

कोच्चि, 26 फरवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने चेन्नई में शरणार्थी के रूप में रह रहे एवं लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के सदस्य होने के संदिग्ध श्रीलंकाई नागरिक को चार साल से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रखने के बाद भी मुकदमा शुरू नहीं होने पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामले में जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति पी. वी. बालकृष्णन की पीठ ने सतकुनम (33) उर्फ ​​सबेसन को राहत प्रदान की। सतकुनम पर लिट्टे के दिवंगत नेता प्रभाकरन के बाहरी सुरक्षा विंग का सदस्य होने का संदेह है।

उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सतकुनम चार साल चार महीने से अधिक समय से कारावास में है और अधीनस्थ अदालत से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में मुकदमे की शुरुआत तथा समाप्त होने की संभावना नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा यह सुविचारित मत है कि यह एक उपयुक्त मामला है जिसमें अपीलकर्ता (सतकुनम) को उसके द्वारा मांगी गई राहत प्रदान की जा सकती है।’’

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि श्रीलंकाई नागरिक को एक लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पेश करने पर रिहा किया जाएगा बशर्ते एर्नाकुलम में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मामलों की विशेष अदालत भी इससे संतुष्ट हो।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया गया कि अपीलकर्ता अक्टूबर 2021 से हिरासत में है और विशेष अदालत की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमा संभवतः जनवरी 2027 में शुरू होगा तथा दिसंबर 2027 तक ही पूरा हो पाएगा।

एनआईए के अनुसार, अपीलकर्ता अवैध साधनों से भारत में दाखिल हुआ और फिर एलटीटीई को पुनर्जीवित करने के लिए दूसरों के साथ साजिश रची।

एनआईए ने उस पर श्रीलंका के खिलाफ युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से हथियार खरीदने, मादक पदार्थ और हथियारों के सौदों के माध्यम से धन जुटाने तथा अपने अपराधों से प्राप्त धन को तमिलनाडु में संपत्तियों में निवेश करने का भी आरोप लगाया था।

विशेष अदालत द्वारा अप्रैल 2024 में जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सतकुनम ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

भाषा यासिर वैभव

वैभव


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